50 साल की रोज़ी-रोटी पर संकट! अंधेरिया मोड़ टेंपो स्टैंड को लेकर मजदूरों में आक्रोश, ‘अटल पार्क’ के नाम पर रोजगार छिनने का आरोप

📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल
रिपोर्टर: विशेष संवाददाता सीनियर पत्रकार मनोज कुमार | We News 24
नई दिल्ली :- मेहरौली/अंधेरिया मोड़। दिल्ली के अंधेरिया मोड़ स्थित टेंपो स्टैंड को लेकर स्थानीय मजदूरों और छोटे कारोबारियों के बीच रोजगार को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्थान से पिछले करीब 50 वर्षों से हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी हुई है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित ‘अटल पार्क’ के नाम पर टेंपो स्टैंड और उससे जुड़े रोजगार को प्रभावित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां टेंपो, माल ढुलाई और छोटे कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1500 परिवारों का पेट चलता है। लोगों का कहना है कि अचानक इस रोजगार व्यवस्था पर संकट आने से मजदूरों और छोटे कारोबारियों के सामने परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
‘कई विधायक आए, किसी ने स्टैंड हटाने की बात नहीं की’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में अलग-अलग विधायक यहां से आए और क्षेत्र की समस्याओं से परिचित रहे, लेकिन टेंपो स्टैंड को हटाने की बात पहले इस तरह सामने नहीं आई। लोगों का कहना है कि जब से बीजेपी विधायक चुने गए हैं, तब से ‘अटल पार्क’ के नाम पर टेंपो स्टैंड को हटाने या रोजगार प्रभावित होने की स्थिति पैदा हुई है।
हालांकि, यह स्थानीय लोगों का आरोप है। इस संबंध में संबंधित विधायक, दिल्ली सरकार/नगर निकाय और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
ये भी पढ़े-
हाईजैक की कोशिश नाकाम: चाकू घोंपे जाने के बाद भी लड़ते रहे भारतीय कैप्टन, 174 लोगों की बचाई जान
मजदूरों का सवाल—रोजगार देंगे या छीनेंगे?
टेंपो स्टैंड से जुड़े लोगों का कहना है कि गरीब और मजदूर वर्ग के लिए यह जगह सिर्फ खड़ी होने या कारोबार करने की जगह नहीं, बल्कि उनके परिवारों की रोज़ी-रोटी का आधार है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि विकास के नाम पर रोजगार का मौजूदा साधन खत्म होता है, तो प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? उनका कहना है कि सरकार से उनकी मांग है कि किसी भी कार्रवाई से पहले रोजगार और परिवारों की आजीविका को ध्यान में रखा जाए।
‘अटल पार्क’ पर सवाल, समाधान की मांग
स्थानीय लोग पार्क और क्षेत्र के विकास के खिलाफ होने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उनका कहना है कि विकास के साथ गरीबों और मजदूरों के रोजगार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि टेंपो स्टैंड हटाया जाना जरूरी है, तो प्रशासन पहले वैकल्पिक स्थान और रोजगार की व्यवस्था स्पष्ट करे।
अब बड़ा सवाल यही है कि अंधेरिया मोड़ के इस पुराने टेंपो स्टैंड से जुड़े मजदूरों और छोटे कारोबारियों के लिए प्रशासन क्या वैकल्पिक व्यवस्था करेगा? क्या विकास और रोजगार दोनों के बीच कोई रास्ता निकलेगा, या वर्षों से यहां से रोज़ी-रोटी कमाने वाले परिवारों के सामने नया संकट खड़ा होगा?
अंधेरिया मोड़ से यह ग्राउंड रिपोर्ट स्थानीय मजदूरों और कारोबारियों की आवाज़ को सामने रखती है। इस मामले में संबंधित विधायक, प्रशासन और अन्य जिम्मेदार पक्ष का आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्ट: वी न्यूज 24 / WE NEWS 24
कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद