हाईजैक की कोशिश नाकाम: चाकू घोंपे जाने के बाद भी लड़ते रहे भारतीय कैप्टन, 174 लोगों की बचाई जान
30 सितंबर, 2026 की सुबह। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 हवा में थी। बोर्ड पर 174 यात्री और क्रू मेंबर्स थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन तभी, कॉकपिट के अंदर कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी फ्लाइट को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया।

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रिपोर्टर: विशेष संवाददाता सीनियर पत्रकार दीपक कुमार | We News 24
एक ऐसा हादसा जो '9/11' बनते-बनते बचा
नई दिल्ली:- 30 सितंबर, 2026 की सुबह। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 हवा में थी। बोर्ड पर 174 यात्री और क्रू मेंबर्स थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन तभी, कॉकपिट के अंदर कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी फ्लाइट को मौत के मुहाने पर ला खड़ा किया।
अचानक विमान ने हाईजैक कोड '7500' भेजा। कुछ ही मिनटों में विमान 17,000 फीट से ज्यादा तेजी से नीचे गिरने लगा। विमान एक बार तो टेलस्पिन की स्थिति में चला गया। जमीन पर बैठे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के हाथ-पांव फूल गए। लेकिन असली जंग तो कॉकपिट के अंदर लड़ी जा रही थी।
कॉकपिट में क्या हुआ?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बाद में खुलासा किया कि फ्लाइट का को-पायलट — जो ओमान का नागरिक था — अचानक चाकू लेकर कैप्टन पर हमला कर बैठा। उसका मकसद साफ था — विमान को क्रैश कराना।
नेतन्याहू ने CNN से कहा, "उन पायलटों ने 9/11 जैसी तबाही को होने से रोक दिया, क्योंकि हालात बिल्कुल वैसे ही थे।"
'गंभीर रूप से घायल थे, फिर भी लड़ते रहे'
कैप्टन स्मित मच्छर — गुजरात के रहने वाले — ने स्पाइसजेट में 11 साल से ज्यादा उड़ान भरी थी और 2022 में फ्लाईदुबई जॉइन किया था। उनके पास 9,750 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है।
हमले में कैप्टन स्मित के शरीर पर कई चाकू लगे। सिर से खून बह रहा था। लेकिन वे हार नहीं माने।
नेतन्याहू ने X पर लिखा, "चाकू घोंपे जाने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने वार किया, विरोध किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसी वजह से यात्री और क्रू मेंबर्स हमलावर को काबू कर सके — और एक बड़ी तबाही टल गई।"
यही वह दरवाजा था जो जिंदगी और मौत के बीच की लकीर बन गया।
यात्रियों ने संभाला मोर्चा
कॉकपिट का दरवाजा खुलते ही एक इजरायली यात्री यानीव हायुन अंदर घुसा। नेतन्याहू के मुताबिक, हायुन ने देखा कि हमलावर विमान के यंत्रों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। पेशे से प्लंबर हायुन ने झट से कंट्रोल स्टिक खींच ली और फिर एक अन्य यात्री तथा क्रू मेंबर्स के साथ मिलकर हमलावर को दबोच लिया।
बाद में नेतन्याहू के सामने हायुन ने बताया, "मैंने कंट्रोल स्टिक खींच ली।" जब पूछा गया कि यह सब कैसे किया, तो उसका जवाब सीधा था — "मैंने एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन (Air Crash Investigation) देखी है।"
डॉक्टर ने कॉकपिट में ही दिया इलाज
फ्लाइट में मौजूद इकलौते डॉक्टर शोता मुसायेव — जो पेशे से इजरायली दंत चिकित्सक हैं — ने खून से लथपथ कैप्टन स्मित को कॉकपिट में ही प्राथमिक उपचार दिया।
मुसायेव ने मीडिया से कहा, "जब मैं कॉकपिट में पहुंचा, तो पायलट की हालत बहुत खराब थी। खासकर सिर से बहुत खून बह रहा था। मैंने खून रोकने की कोशिश की और उनका ब्लड प्रेशर स्थिर किया।"
इसके बाद फ्लाइट में मौजूद दो अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान को संभाला और सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई। सभी 174 लोग सुरक्षित हैं।
दुनिया भर से सराहना
घटना सामने आते ही कैप्टन स्मित की बहादुरी की चर्चा हर तरफ होने लगी।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा, "सबसे गंभीर खतरे के बावजूद, गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने असाधारण साहस और दूसरों की जान बचाने का दृढ़ संकल्प दिखाया। उनकी वीरता ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई और एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। भारत को कैप्टन मच्छर पर गर्व है।"
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सराहना और भी सीधी थी। उन्होंने X पर लिखा, "मैं भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर की असाधारण वीरता को नमन करता हूं। उन्होंने 174 लोगों की जान बचाई, जिनमें इजरायली नागरिक और अन्य देशों के लोग शामिल थे। वे सच्चे हीरो हैं।"
भारतीय दूतावास (सऊदी अरब) के मुताबिक, कैप्टन स्मित का तबूक के अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। उनके माता-पिता मुंबई से सऊदी अरब के लिए रवाना हो चुके हैं।
जांच जारी
हमलावर की मंशा अभी साफ नहीं हो पाई है। ओमानी को-पायलट को सऊदी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है और पूछताछ चल रही है। इजरायल ने कहा है कि उसे भी पूछताछ में शामिल होने की अनुमति मिली है। फ्लाईदुबई ने एक बयान में कहा कि "जल्दबाजी में अंदाजा लगाने से बचें" और घटना के असली कारणों की जांच जारी है।
लेकिन जांच का नतीजा जो भी हो, एक बात साफ है — उस खतरनाक पल में एक भारतीय कैप्टन ने अपने शरीर पर चाकू खाए, खून बहाया, लेकिन 174 लोगों को जिंदा रहने का मौका दिया।
करीब एक साल पहले एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कैप्टन स्मित ने अनजाने में ही कहा था — "जब चीजें गलत हो जाएं, तो आपको कौन बचाएगा?" आज वे खुद उस सवाल का जवाब बन गए हैं।
We News 24 | विशेष रिपोर्ट
(यह रिपोर्ट इजरायल प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान, भारत सरकार के बयान और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना के कुछ विवरणों की अभी और पुष्टि की जा रही है।)
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