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    पटना : खरवार समाज और पुलिस में भिड़त पुलिस ने खरवारों पर बरसायी लाठियां.





    WAORS हिंदी न्यूज  डेस्क »बिहार पटना 
    सुजीत कुमार भारती और मिंटू खरवार की रिपोर्ट 

    बिहार :पटना जब राज्य की सरकार ही जनता का सुध नहीं ले तो अराजकता का माहोल बनता है | ऐसे ही एक खबर आरई है पटना से खरवार समुदाय और पुलिस में भिडंत हो गयी |  खरवार समाज का आरोप है की राज्य सरकार  उसकी अनदेखी कर  रही है| और उनका कोई सुनने वाला नहीं है |वो अपनी मांगो को लेकर 4 दिस्मबर 2018 से धरने पर बठे है | 

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    आइये जानते है क्या है मामला 

    बिहार में इनकी जाती  बिहार सरकार के जाति सूचक में 17 नंबर पर जनजाति में अंकित है | खरवार समाज उसी रिकोर्ड के आधार पर अपने जाती प्रमाण पत्र मांग कर रहे है | पर बिहार सरकार इनकी मांगो को अनदेखा कर रही है |जबकि इस सम्बन्ध में केंद्र ने बिहार सरकार पत्र जरी कर कहा की इनकी समस्या का समाधान करते हुए जो इनकी जाती रिकोर्ड में है उस आधार पर इनका प्रमाण पत्र मुहैया कराया जाय |

    पर केंद्र की अनुसूचित जनजाति आयोग की पत्र को नितीश सरकार ने दर किनार कर दिया है तभी से खरवार समाज के लोग ने फैसला किया की जबतक हमारी समस्या का समाधान नहीं हो जाता ये आन्दोलन जारी रहेगा |

    औरपूर्व घोषित कार्यक्रम के लिए बिहार के प्रत्येक कोने से हजारों की संख्या में महिला पुरुष और युवा पहुंचे और मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए निकले जहां प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने से पूर्व ही पुलिस और खरवार समुदाय के लोगों के साथ भिड़न्त हो गयी. जहां पुलिस द्वारा जमकर लाठियां भांजी गयी. हांलांकि इस घटना में लोगों को आंशिक रुप से चोटें आयी |

    धरना का नेतृत्व कर रहें रामनारायण खरवार कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष राजू खरवार ने कहा कि ' बिहार सरकार जाति प्रमाण पत्र की मांग पुलिसिया बर्बरता का डर दिखा आवाज को दबाना चाहती है.जबकि समस्याग्रस्त खरवार ( पेशाकार्य कहार कमकर ) की मांग का स्थायी समाधान हेतू जनजातीय कार्य मंत्रालय दिल्ली के द्वारा निर्देशित करते हुए कहा कि ' कहार ,कमकर,कमुआ,भूल्ला आदि ये पेशा का नाम है जो चंद्रबंशी समुदाय के लोगों में भी यह पेशा नाम शामिल है|


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     चंद्रबंशी समाज का सरकार ने पिछडा वर्ग आयोग के अनुशंसा पर  वर्ष 2008 में ही उनकी समस्या का समाधान चंद्रबंशी ( कहार ,कमकर) लिखकर अतिपिछडा के सूचि 30 पर अंकित कर दिया.वही खरवार पेशाकार्य कहार कमकर के मसले को  वर्ष 2011 से ही लटकाये हुए है.
    वहीं प्रदेश सचिव राजेश खरवार ने कहा कि जबतक खरवार समाज को उनका वास्तविक पहचान नहीं मिल जाता .हम इस धरनास्थल से खाली हाथ नहीं वापस नहीं जायेगे. बिहार में सरकार गुंगी और.पदाधिकारी बहरें है.यह तब ज्ञात हुआ जब अनुसूचित जनजाति आयोग के चेयरमैन रामानंद


    Posted by:अमिताभ मिश्रा

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