कोंग्रेस और आप पार्टी गठबंधन की कोशिश तीसरी बार फेल,गठबंधन को लेकर पांच बड़ी वजह
WAORS हिंदी न्यूज डेस्क »नई दिल्ली
नई दिल्ली :लोकसभा चुनाव को लेकर बीते दो महीने से आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही गठबंधन की कोशिश मंगलवार को तीसरी बार फेल हो गई। गठबंधन की कोशिशों के नाकाम होने के पीछे कई अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।
दोनों दलों में कुछ ऐसे धड़े थे, जो गठबंधन के पक्ष में नहीं थे। कार्यकर्ताओं की ओर से शीर्ष नेतृत्व को इस बारे में अवगत भी कराया गया था। उसके बाद भी बातचीत का सिलसिला तो जारी रहा, मगर कभी दिल्ली-पंजाब में सीट बंटवारा तो प्रदेश इकाई के विरोध के चलते गठबंधन से दोनों दलों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। पर, सूत्र बताते हैं कि गठबंधन को लेकर पांच बड़ी वजहे हैं, जिसके कारण दोनों दलों में बात नहीं बनी।
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1- कांग्रेस नेताओं का दबाव
कांग्रेस की दिल्ली इकाई आम आदमी पार्टी से गठबंधन के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर स्थानीय नेताओं का दबाव है, जिसके चलते फिलहाल गठबंधन टल गया है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि इससे कांग्रेस के परंपरागत वोटर कट जाएंगे।
2- पंजाब में सीट पर विवाद
दिल्ली के तीन-तीन-एक के फॉम्र्यूले की तर्ज पर ‘आप' पंजाब में भी छह-छह-एक के फाम्र्यूले पर सीट बंटवारा चाहती है। लेकिन, पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कई प्रदेश स्तर के नेता इसके पक्ष में नहीं है।इसलिए गठबंधन को लेकर दोनों दलों में सहमति नहीं बन पा रही है।.
दिल्ली के तीन-तीन-एक के फॉम्र्यूले की तर्ज पर ‘आप' पंजाब में भी छह-छह-एक के फाम्र्यूले पर सीट बंटवारा चाहती है। लेकिन, पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कई प्रदेश स्तर के नेता इसके पक्ष में नहीं है।इसलिए गठबंधन को लेकर दोनों दलों में सहमति नहीं बन पा रही है।.
3- राजीव गांधी प्रस्ताव
दिल्ली विधानसभा सत्र में एक-दो महीने पहले पूर्व पीएम राजीव गांधी से भारत रत्न वापसी को लेकर प्रस्ताव पास हुआ था। हालांकि, बाद में ‘आप' ने इससे इनकार कर दिया था।इसको ध्यान में रखकर भी कांग्रेस के कुछ आला नेता गठबंधन पर ‘आप' को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। इस मुद्दे से भी मामला बिगड़ रहा है।
दिल्ली विधानसभा सत्र में एक-दो महीने पहले पूर्व पीएम राजीव गांधी से भारत रत्न वापसी को लेकर प्रस्ताव पास हुआ था। हालांकि, बाद में ‘आप' ने इससे इनकार कर दिया था।इसको ध्यान में रखकर भी कांग्रेस के कुछ आला नेता गठबंधन पर ‘आप' को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। इस मुद्दे से भी मामला बिगड़ रहा है।
4- किस सीट पर कौन लड़ेगा
दिल्ली में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और ‘आप' में सहमति नहीं बन पा रही है।किस सीट पर कौन दल का प्रत्याशी लड़ेगा, इसको लेकर मतभेद रहा। यमुनापार की दो सीटों पर कांग्रेस का वोट बैंक अच्छा खासा है। इनमें से एक सीट कांग्रेस चाहती है, लेकिन, दोनों सीटों पर ‘आप' पहले से ही अपना प्रत्याशी उतार चुकी है।
दिल्ली में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और ‘आप' में सहमति नहीं बन पा रही है।किस सीट पर कौन दल का प्रत्याशी लड़ेगा, इसको लेकर मतभेद रहा। यमुनापार की दो सीटों पर कांग्रेस का वोट बैंक अच्छा खासा है। इनमें से एक सीट कांग्रेस चाहती है, लेकिन, दोनों सीटों पर ‘आप' पहले से ही अपना प्रत्याशी उतार चुकी है।
5- कई 'आप' नेता भी विरोध में
आम आदमी पार्टी के अंदर भी एक बड़ा धड़ा गठबंधन को लेकर खुश नहीं। वह नहीं चाहता ‘आप' का गठबंधन कांग्रेस के साथ हो। पंजाब से सांसद भगवंत मान कांग्रेस से गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं।वह कई बार इसके पक्ष में अपनी राय दे चुके हैं।कई आप नेताओं का कहना है कि गठबंधन से जनता में गलत संदेश जाएगा।
आम आदमी पार्टी के अंदर भी एक बड़ा धड़ा गठबंधन को लेकर खुश नहीं। वह नहीं चाहता ‘आप' का गठबंधन कांग्रेस के साथ हो। पंजाब से सांसद भगवंत मान कांग्रेस से गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं।वह कई बार इसके पक्ष में अपनी राय दे चुके हैं।कई आप नेताओं का कहना है कि गठबंधन से जनता में गलत संदेश जाएगा।
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फिलहाल संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई
कांग्रेस की ओर से तीन बार गठबंधन के इनकार के बाद भी अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई है। गोपाल राय से जब मंगलवार को पूछा गया कि क्या अब कांग्रेस से गठबंधन नहीं होगा। इस पर उन्होंने कहा कि यह बेहद काल्पनिक सवाल है। अभी कुछ कहना मुश्किल है। हम कांग्रेस के साथ गठबंधन सिर्फ देशहित में चाहते हंै, महागठबंधन के दलों का फैसला था कि विपक्षी मतों का बटंवारा ना हो। जो जहां मजबूत है, वह मिलकर चुनाव लड़ें। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के दरवाजे अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुए है। देशहित में अगर जरूरत हुई और किसी एक फाम्र्यूला पर बात बनी तो यह गठबंधन संभव है। हालांकि, उनका कहना था कि जो भी फाम्र्यूला तय होगा, उसे दिल्ली के साथ पंजाब में भी लागू किया जाएगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि दिल्ली के साथ पंजाब में सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों दलों में असहमति है। हालांकि, पार्टी नेताओं का इससे इनकार है। पार्टी का कहना है कि अभी तक सीट बंटवारे पर बात ही नहीं हुई है।
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