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    लोहिया आवास सीतामढ़ी में हिंदी दिवस पखवाड़ा पर विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया




    We News 24 Hindi »सीतामढ़ी /बिहार

    पवन साह  की रिपोर्ट



    सीतामढ़ी: अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला अध्यक्ष मुरलीधर झा मधुकर की अध्यक्षता में लोहिया आवास सीतामढ़ी में हिंदी दिवस पखवाड़ा पर विचार गोष्ठी और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। परिषद के संरक्षक उमाशंकर लोहिया ने राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग सरकार से की ।हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा इसलिए अभी मिलना चाहिए क्योंकि यह सर्वाधिक लोकप्रिय और सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है ।किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी राष्ट्रभाषा होती है ।


    मुख्य वक्ता के रूप में नई सुबह पत्रिका के सम्पादक डॉ दशरथ प्रजापति ने कहा राजभाषा के रूप में हिंदी प्रतिष्ठित है यदि राष्ट्रभाषा के रूप में इसे सम्मान दिया जाता है तो हिंदी भाषा का सम्मान मिलेगा ।और हिंदी भाषा का स्वाभाविक विकास भी होगा। प्रोफ़ेसर विनय कुमार सिंह ने कहा विश्व के अन्य देशों में भी उसकी अपनी राष्ट्रभाषा है परंतु भारत की राजभाषा हिंदी का राष्ट्रभाषा ना बनना दुर्भाग्यपूर्ण है ।इसके लिए आंदोलन की आवश्यकता है ।परिषद के अध्यक्ष मुरलीधर झा  मधुकर द्वारा आग्नेय कुमार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद सीतामढ़ी का मीडिया प्रमुख के दायित्व देकर माला से स्वागत किए।


    द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें आचार्य धीरेंद्र झा ने हिंदुस्तान की शान बढ़ाती हिंदी, राजेंद्र सहनी ने सड़क से संसद तक बोली जाए हिंदी ,रामबाबू सिंह ने मजहब से नहीं नाता इसको,सबकी है हमजोली हिंदी कविता पाठ कर मंत्रमुग्ध किया ।वही राम किशोर सिंह चकवा ने हिंदी बोलने से होता है हिंदुस्तान की पहचान गायन किया ।डॉक्टर अवधेश झा ने सबके प्यारे सबसे न्यारे बने रहे संसार में ,जितेंद्र झा आजाद ने शान हमारी हिंदी है अरमान हमारी हिंदी है और शंभू सागर ने मिलावट हर चीज में अच्छी नहीं होती रचना से सबका दिल जीता।


     विकास कुमार शिक्षक ने हिंदी दिवस हिंदी दिवस कोरोना के काल में भव्य दुर्दशा हो रही सभ्य सुंदर समाज में ,मोहम्मद इमाम अली ने महबूब की प्यारी है हिंदी एक राजदुलारी है हिंदी का गायन किया। अनस कैफी ने प्रभात की रानी है हिंदी एक सांझ सुहानी है हिंदी और कौशल कुमार झा ने बस एक रस्म है आज भर के लिए मैं निभाता रहूं तुम निभाते रहो, संस्था के अध्यक्ष मुरलीधर झा मधुकर ने भारत के आत्मा प्राण और मीत है हिंदी आर्यावर्त के मन का संगीत है हिंदी का गायन किया ।


    आग्नेय कुमार ने हिंदी है प्यारी भाषा अपनी है मातृभाषा सब मिल इसका सम्मान करिए का गायन किया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संरक्षक उमाशंकर लोहिया ने दाग न लगने पाए कभी एकता की मिसाल पर, राम नाम के स्वरों में घुलना आजान जरूरी है का सस्वर गायन कर तालियां बटोरी। कार्यक्रम का संचालन संगठन मंत्री बाल्मीकि कुमार ने किया और कोरोना काल में फूल माली और नेता के संवाद को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।



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