इस वीकेंड के आपके लिए बेस्ट रहेंगे दिल्ली मेहरौली के ये पिकनिक स्पॉट
पिकनिक का नाम सुनते ही बच्चों के साथ-साथ बड़े भी बेहद खुश हो जाते हैं, अगर आप भी दक्षिणी दिल्ली में पिकनिक मनाने की सोच रहे हैं, तो इस लेख में हमने आपको इस मुग़ल कालीन शहर मेहरौली के आसपास के बेस्ट पिकनिक स्पॉट की जानकारी दे रहे है
We News 24» रिपोर्टिंग / दीपक कुमार
नई दिल्ली : मुग़ल कालीन शहर मेहरौली में और उसके आसपास कई पिकनिक स्पॉट मौजूद हैं, और प्रकृति प्रेमियों या सांस्कृतिक प्रेमियों को ये जगह बेहद पसंद आती है। जंगल सफारी मुग़ल कालीन ईमारत खुबसूरत पिकनिक हट पार्क पक्षी की कई प्रजातियां देख सकते हैंकुतब मीनार जैसी खूबसूरत जगह संजय वन में आप पक्षी की कई प्रजातियां देख सकते हैं, 12 सदी में निर्मित दादा वाड़ी प्राचीन जैन मंदिर, जमाली कमाली माधी मस्जिद जैसे स्थान इतिहास और सांस्कृतिक प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। अगर आप भी इस वीकेंड अपने बच्चों के साथ, दोस्तों या पार्टनर के साथ पिकनिक पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इस वीकेंड इस लेख में बताई गई जगहों का भ्रमण कर सकते हैं
संजय वन
रोमंचो से भरा संजय वन दक्षिण पश्चिम दिल्ली में कुताबी संस्थागत क्षेत्र के पास स्थित है ये वन 784 एकड़ में फैला एक विशाल वन क्षेत्र है।
जिसमे आपको कई जिव जंतु खुबसूरत पार्क झील पाराचिन लालकोट के दीवार गुरु गोरखनाथ मंदिर देखने को मिलेगा यंहा आपको लगेगा ही नहीं की आप शोरशराबे वाली दिल्ली में है .
ऐसा अनभुव होगा की कही दूर किसी पहाड़ी जंगल सफारी की सैर पर है .
क़ुतुब मीनार
क़ुतुब मीनार ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। यह दिल्ली का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। इसकी ऊँचाई 72.5 मीटर (237.86 फीट) और व्यास १४.३ मीटर है, जो ऊपर जाकर शिखर पर 2.75 मीटर (9.02 फीट) हो जाता है। इसमें ३७९ सीढियाँ हैं।[1] मीनार के चारों ओर बने अहाते में भारतीय कला के कई उत्कृष्ट नमूने हैं, जिनमें से अनेक इसके निर्माण काल सन 1192 के हैं। यह परिसर युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में स्वीकृत किया गया है।
अहिंसा स्थल
अहिंसा स्थल एक जैन मंदिर है तथा बदरपुर रोड और अरबिंदो मार्ग चैराहे, महरौली, दिल्ली में स्थित है। यह मंदिर जैन समुदाय का एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की मुख्य प्रतिमा भगवान महावीर की है जोकि 24वें व अंतिम तीर्थंकर थे। यहां श्री महावीर का एक भव्य प्रतिमा को स्थापित किया गया है ।
श्री महावीर की यह प्रतिमा एक ग्रेनाइट पत्थर से बनी हुई है जिसकी ऊँचाई लगभग 13 फीट 6 इंच है तथा इसका वचन लगभग 30 टन है। यह प्रतिमा एक कमल के आसन पर विराजमान है जिसकी ऊँचाई 2 फीट 8 इंच है इसका वचन लगभग 17 टन है। प्रतिमा के दोनों तरफ शेर की प्रतिमा स्थिति है। अहिंसा स्थल पर सभी जाति व धर्म के लोग पूजा अर्जना के लिए आते है। यह का वातावरण यहां आये लोगों के लिए सुख, शांति व स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम स्थान है। यहां का वातारण बहुत शांति प्रदान करने वाला है।
जमाली कमाली पार्क
कुतुबमीनार के नजदीक महरौली के पुरातत्व पार्क में स्थित जमाली-कमाली का मकबरा मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। मकबरा के भीतर खूबसूरत नक्काशी और पेंटिंग्स है। पेंटिंग्स में विविध रंगों का प्रयोग किया गया है। छतों और दीवारों पर पिचकारी है। इसमें पेड़-पौधों की कलात्मक पेंटिंग्स बनी है। बाहर बरामदे में भी रंगोली बनी है। दीवार को रंगने में सफेद रंग का प्रयोग हुआ है।
6 वीं शताब्दी का यह मकबरा शेख फजलुल्लाह उर्फ जमाली का है। जमाली के मकबरे का निर्माण हुमायूं के समय में पूरा हुआ था। मकबरे में दो कब्रें हैं। ऐसा माना जाता है कि एक कब्र जमाली की है और दूसरा कमाली की। खास बात यह है कि मकबरा का डिजाइन मरने से पहले खुद जमाली ने तैयार किया था। जमाली-कमाली के मकबरे वाले परिसर में 12 और मकबरे स्थित हैं, जबकि परिसर में ही स्थित एक अन्य खुले कमरे में 11 मकबरे हैं।
| माधी मस्जिद mehrauli |
माधी मस्जिद
अगर आप वास्तव में मध्यकालीन वास्तुकला में रुचि रखते हैं माधी मस्जिद आपके लिए एक ताज़ा बदलाव साबित होगा! माधी मस्जिद एक शानदार स्मारक है जो प्रमुखता से स्थित है और आने में भी आसान है, इसलिए आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि बहुत कम ही लोग इसके बारे में जानते हैं। क्योंकि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि यह क्या है क्योंकि स्मारक में किसी नाम या विवरण के साथ कोई नोटिस बोर्ड नहीं लगा है। रुचि रखते हैं यह स्मारक 15वीं शताब्दी की मानी जाती है,यह मेहरौली पुरातत्व पार्क जमाली कमाली के ठीक किनारे पर स्थित है .
1221 ईस्वी का जैन मंदिर
बताया जाता है कि महरौली स्थित दादाबाड़ी मंदिर दादा गुरु मणिधारी जिनचन्द्र सूरी जी के इस स्थान पर देहत्याग के बाद उनकी पावन स्मृति में बनाया गया है। पूरे विश्व में तीन प्रमुख दादाबाड़ी हैं जो अजमेर, मालपुरा और महरौली में हैं और श्वेतांबर जैन धर्म के खरतारा गच्चा संप्रदाय के चार गुरुओं की पुण्यभूमि हैं।
| जैन मंदिर दादा वाड़ी |
दादागुरु मणिधारी जिनचन्द्र सूरी जी का जन्म सन् 1140 ईसवीं में जैसलमेर के विक्रमपुर नामक स्थान पर हुआ था और सन् 1166 में, यानि 26 वर्ष की पूर्ण युवावस्था में आपने महरौली में, जो उन दिनों योगिनीपुर के नाम से जाना जाता था, इसी स्थान पर देहत्याग किया था। बाल्यकाल से ही अपने अलौकिक ज्ञान के कारण वह जैन समाज में गुरु पद पर आसीन हुए और अपने मतावलंबियों को सत्य, अहिंसा, भाई चारे, सर्वधर्म समभाव का संदेश देते रहे।इस मंदिर में आपको शांति और सकून का अनुभव होगा .
पिकनिक हट पार्क
दादाबादी रोड पर जैन मंदिर, महरौली के सामने स्थित है.. यह लगभग 1.2 किमी के गोलाकार गोल ट्रैक के साथ एक बहुत बड़ा और बड़ा पार्क है। यह ट्रैक हरे भरे पेड़ों, पौधों और झाड़ियों से घिरा हुआ है। पार्क के भीतर कुछ खेल के मैदान हैं जहाँ बच्चे, युवा और बूढ़े सभी आते हैं और विभिन्न बाहरी गतिविधियाँ करते हैं।
आप लोगों को क्रिकेट, बैडमिंटन, फ़ुटबॉल, वॉलीबॉल, योग करते, एरोबिक्स, दौड़ते हुए, आदि खेलते हुए देख सकते हैं। दो स्थान पर व्यायाम मशीनें लगाई गई हैं। वॉशरूम की सुविधा है। इस पार्क में कुछ स्थानों पर कुछ पुराने स्मारक जैसी निर्मित संरचनाएं हैं जो इसकी सुंदरता में भी इजाफा करती हैं। आप सुबह और शाम को क्वालिटी टाइम बिताने के लिए जा सकते हैं और कुछ ताजी हवा में सांस ले सकते हैं। इस पार्कपरिसर में एक दुर्गा माता की मंदिर और एक मस्जिद भी है .

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