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    ज्ञानवापी मस्जिद मामला ,मुगल लुटेरो ने मंदिर तोड़ा ,खजाना लूटा लेकिन नहीं हिला पाया शिवलिंग, शिवमहापुराण में छिपा है इसका राज



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    We News 24»रिपोर्टिंग सूत्र / दिनेश जयसवाल 

    वाराणसी  :  मुगलकालीन सभी इतिहासकारों ने अपने लेख में यह लिखा है कि काशी विश्वनाथ के  प्रधान शिवालय को  विध्वंस  करने के बाद बाबर और औरंगजेब  जैसे चोर लुटेरो ने अपने साथ बेशकीमती पत्थर  दिखने वाले शिवलिंग ले जाने की अथक प्रयास किया लेकिन उसके तमाम कोशिशों के बाद भी वे शिवलिंग को उसके मूल स्थान से हिला नहीं सके। अंतत: शिवलिंग छोड़ कर  सारा खजाना लेकर चले गए।

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    शिवलिंग को अपने साथ ले जाने की उनकी तमाम कोशिशें क्यों नाकाम हुईं, इसका उत्तर शिवमहापुराण के 22वें अध्याय के 21वें श्लोक में मिलता है। यह खुलासा इन दिनों पुराणों का विशेष अध्ययन कर रहे बीएचयू में इतिहास विभाग के प्रो. प्रवेश भारद्वाज ने किया है। प्रो. भारद्वाज के अनुसार इतिहास गवाह है कि कुतुबुद्दीन ऐबक, रजिया सुल्तान, सिंकदर लोदी और औरंगजेब ने काशी के देवालयों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया। सभी ने अपने-अपने काल में काशी के प्रधान शिवालय पर भी आक्रमण किए।


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    मंदिर का खजाना लूटा लेकिन लाख कोशिश के बाद भी शिवलिंग को अपने साथ नहीं ले जा सके। शिवलिंग अपने स्थान से टस से मस इसलिए नहीं हुए कि क्योंकि वे शिव के आदेश का पालन कर रहे हैं। शिवमहापुराण में एक श्लोक है-‘अविमुक्तं स्वयं लिंग स्थापितं परमात्मना। न कदाचित्वया त्याज्यामिंद क्षेत्रं ममांशकम्।’ अर्थात अप्रकाशित लिंग स्वयं सर्वोच्च आत्मा द्वारा स्थापित किया गया है। आप इस क्षेत्र को कभी नहीं छोड़ेंगे, जो मेरा हिस्सा है।

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