नेपाल में धर्मांतरण पर कानूनी प्रतिबंध के बावजूद निचिरेन शोशु जैसे संगठनों द्वारा कथित धर्मांतरण अभियान कैसे फैल रहे हैं ?
काठमांडू :-नेपाल, जो एक समय हिंदू राष्ट्र के रूप में जाना जाता था, अब एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है। हालांकि हिंदू आबादी अभी भी बहुसंख्यक है, लेकिन हाल के वर्षों में विभिन्न संगठनों द्वारा धर्मांतरण गतिविधियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसमें निचिरेन शोशू का नाम भी प्रमुखता से सामने आता है। यह संगठन धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर विवादों में है, खासकर नेपाल में भूकंप के बाद उनके कथित धर्मांतरण अभियानों की खबरों के कारण।
ये भी पढ़े-कन्हैया लाल उमेश कोल्हे हत्याकांड के खिलाफ निकला शांतिपूर्ण संकल्प मार्च को महरौली पुलिस ने जबरन रोका
निचिरेन शोशू धर्मांतरण का विस्तार कैसे कर रहा है?
भूकंप के बाद का माहौल:
- 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया। इस दौरान निचिरेन शोशू ने राहत सामग्री और सहायता के नाम पर बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया।
- तत्कालीन आपदा में जरूरतमंदों को भोजन, आश्रय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए, कथित तौर पर संगठन ने लगभग एक लाख से अधिक हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को धर्मांतरण के लिए राजी किया।
सामाजिक सेवा की आड़:
- संगठन समाजसेवा के नाम पर गरीब और आपदा प्रभावित लोगों को निशाना बनाता है। यह रणनीति लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने और उन्हें अपने धर्म में लाने के लिए कारगर होती है।
- वे दावा करते हैं कि उनकी प्रार्थना से असाध्य बीमारियां ठीक हो जाती हैं और प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सकता है।
आर्थिक मदद और विदेशी फंडिंग:
- निचिरेन शोशू को बड़े पैमाने पर विदेशी फंडिंग मिलने की बात कही जाती है, जिसका उपयोग भव्य मंदिरों के निर्माण और धर्मांतरण अभियानों के लिए किया जाता है।
- नेपाल के भक्तपुर क्षेत्र में अरबों की लागत से मंदिर बनाने की खबरें सामने आई हैं।
धर्मांतरण विधियां:
- संगठन हिंदू और बौद्ध धार्मिक विश्वासों को कमजोर करने के लिए प्रचार करता है।
- भगवान बुद्ध, जिन्हें हिंदू धर्म में विष्णु के अवतार के रूप में माना जाता है, के बारे में संगठन के विवादास्पद दावे हिंदू संगठनों को उकसाते हैं।
ईसाई मिशनरियों जैसी रणनीति:
- निचिरेन शोशू की कार्यप्रणाली काफी हद तक ईसाई मिशनरियों जैसी है, जो सहायता और प्रार्थना के नाम पर लोगों को प्रभावित करती हैं।
- संगठन के प्रचार में दावा किया जाता है कि उनकी प्रार्थना से कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां ठीक हो सकती हैं, जो अक्सर जरूरतमंद लोगों को उनकी ओर आकर्षित करता है।
नेपाल में धर्मांतरण कानून और उसकी सीमाएं
नेपाल में 2015 के संविधान और 2018 की दंड संहिता के अनुसार:
धर्मांतरण अपराध है:
- किसी को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना या प्रोत्साहित करना कानूनन प्रतिबंधित है।
- अपराधी को 5 साल तक की जेल और 50,000 नेपाली रुपये का जुर्माना हो सकता है।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना:
- किसी धर्म विशेष के अनुयायियों की भावनाओं को आहत करने पर 2 साल की जेल और 2,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।
कानून लागू करने की चुनौतियां:
- नेपाल के दुर्गम इलाकों में सरकारी निगरानी कमजोर है।
- अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रदान की गई फंडिंग और विदेशी दबाव के कारण कानून लागू करना मुश्किल हो जाता है।

तस्वीर में देखे निचिरेन शोशु के धर्मगुरु सिदो ओगावा को गोजुकाई करते हुए
नेपाल में निचिरेन शोशू का बढ़ता प्रभाव: कारण और चिंताएं
भौगोलिक और सामाजिक कारक:
- नेपाल के दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में गरीबी और शिक्षा की कमी के कारण लोग जल्दी से प्रभावित हो जाते हैं।
- कमजोर प्रशासन और सीमित कानूनी कार्रवाई भी धर्मांतरण गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करते हैं।
आस्थाओं पर चोट:
- हिंदू और बौद्ध समुदाय इस बात को लेकर आक्रोशित हैं कि निचिरेन शोशू जैसे संगठन धार्मिक मान्यताओं को कमजोर कर रहे हैं।
- भगवान बुद्ध के बारे में दिए गए विवादित बयान विशेष रूप से विवाद का कारण हैं।
राजनीतिक समर्थन:
- इस बात की संभावना है कि नेपाल में धर्मांतरण गतिविधियों को राजनीतिक या बाहरी समर्थन प्राप्त हो।
समस्या के समाधान के लिए सुझाव
कानूनी सख्ती:
- धर्मांतरण कानूनों को सख्ती से लागू करना और विदेशी फंडिंग पर निगरानी बढ़ाना।
सामाजिक जागरूकता:
- ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को धर्मांतरण रणनीतियों के प्रति सतर्क करना।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
- नेपाल को अंतरराष्ट्रीय संगठनों और दूतावासों से संपर्क करके धर्मांतरण अभियानों की जांच करनी चाहिए।
सांस्कृतिक एकता:
- नेपाल के बहुसंख्यक हिंदू और बौद्ध समुदायों के बीच एकता को बढ़ावा देना, ताकि धर्मांतरण की गतिविधियों का सामना किया जा सके।
यह स्थिति केवल नेपाल की नहीं है बल्कि यह भारत जैसे पड़ोसी देशों को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सभी संबंधित देशों को मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद