गरीबरथ में सेवा के नाम पर यात्रियों को मिल रहे बदबूदार व फटे कंबल, चूहे व कॉकरोच का आतंक, गंदी बोगी
We News 24 Digital News» रिपोर्टिंग सूत्र / दीपक कुमार
रांची।साल 2006 में निम्न और मध्यम वर्ग के यात्रियों को कम किराये में एसी की सुविधा देने के लिए गरीब रथ की शुरुआत की गई थी लेकिन अब गरीब रथ में सेवाएं भी अब गरीब दिखने लगा है ।सुविधा के नाम पर चूहों का आंतक फटा और बदबूदार कम्बल दिया जाता है .
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वैसे तो देश के तक़रीबन गरीब रथ का यही हाल है .लेकिन अभी हम बाते कर रहे है रांची दिल्ली गरीब रथ का आपको बताते चले की पेस्ट कंट्रोल के लिए रांची रेल मंडल में 80 लाख रुपये तीन साल में खर्च किए जाते हैं। तो सवाल ये उठता है की इतने पैसे खर्च करने के बाद गरीब रथ की दुर्गति क्यों ? पैसे देने के वावजूद भी यात्री परेशान क्यों ?
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गरीब रथ के अंदर बोगी में इतनी गंदगी पसरा रहता है . कि वहां बैठना मुश्किल है लेकिन कोई सफाई नहीं होती। यात्री गंदगी में यात्रा करने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं अगर इसकी शिकायत अगर टीटीई से शिकयात करे तो वो भी नहीं सुनते है .शोचालय के छत से पानी टपकता है ट्रेन में खाने की गुणवता भगवान भरोसे है .खाने का पैसा भी मनमाना अगर आप खाने की रसीद मांग ली तो कैटरर के कर्मी यात्री आप से लड़ जायेंगे ।
डीआरएम करेंगे मामले की जाँच
जब इन सभी बातो की जानकारी रांची रेल मंडल डीआरएम प्रदीप गुप्ता को मिली तो गुप्ता ने कहा कि अगर ऐसी समस्या यात्रियों को हो रही है तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और मामले की जांच की की जाएगी। लापरवाही बरतने पर नियम संगत कार्रवाई भी की जाएगी।
2006 में गरीब रथ ट्रेनों की शुरुआत
बताते चले कि रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने साल 2006 में गरीब रथ ट्रेनों की शुरुआत की थी। भारत में अभी कुल 26 जोड़ी गरीब रथ ट्रेनें चलाई जाती हैं। गरीब रथ की शुरुआत निम्न और मध्यम वर्ग के यात्रियों को कम किराये में एसी की सुविधा देने के लिए की गई थी लेकिन इस ट्रेन के भी हाल-बेहाल है।
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