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    मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक झगड़े में सिर्फ एक समुदाय पीड़ित नहीं होता.


    मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक झगड़े में सिर्फ एक समुदाय पीड़ित नहीं होता.


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    We News 24 Digital News» रिपोर्टिंग सूत्र / अमित मेहलावत


     नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर हिंसा मामले पर सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक संघर्ष का शिकार केवल एक समुदाय नहीं होता है. चीफ जस्टिस ने कहा है कि मणिपुर राज्य में हीलिंग टच की भी जरूरत है. राज्य में हिंसा बेरोकटोक चल रही है. सीजेआई ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि हमें यह जानने की जरूरत है कि 6000 एफआईआर में कितनी जीरो एफआईआर हैं और कितनी न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजी गई हैं, कितनी यौन हिंसा जुड़ी हैं और कितने लोग न्यायिक हिरासत में हैं, 164 के तहत के कितने लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं?

     


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    हिंसा के बीच दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने वाले वीडियो पर सीजेआई ने कहा कि इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने का कोई औचित्त नहीं है सकता है. तीन महिलाओं की परेड कराई गई है और 2 का यौन उत्पीड़न किया गया है ऐसे में तुरंत एफआईआर दर्ज करने में क्या दिक्कत थी?


    सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इंफाल कार वॉश की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पास समय की कमी है. मैंने इंफाल कार वॉश की घटना के बारे में पढ़ा है, वहां क्या हुआ इस पर कौन बयान देगा. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने दलील पेश करते हुए कहा कि जी समय वीडियो सामने आया उसके बाद पुलिस ने 7 लोगों की गिरफ्तारी की.

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    सरकार बोली- वीडियो सामने आने के बाद 7 लोगों की हुई गिरफ्तारी

    सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि जिस समय महिलाओं का वीडियो सामने आया उसके बाद 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया. जिसके बाद सीजेआई ने कहा कि हिंसा से जुड़े सभी तथ्य मीडिया में हैं. इस पर व्यापक रूप से रिपोर्ट की गई है, लेकिन यह बड़ी अजीब बात है कि मणिपुर सरकार के पास तथ्य नहीं हैं.


    सांप्रदायिक संघर्ष का शिकार केवल एक समुदाय नहीं होता

    अदालत ने आगे कहा कि इस हिंसक कृत्य पर जाति आदि से ऊपर उठकर ध्यान देना हमारा कर्तव्य है. मुझे पता है कि कुकी आदि से वरिष्ठ लोग सामने आए हैं, लेकिन आश्वस्त रहें कि हम किसी भी जाति या समुदाय के बावजूद इस पर गौर करेंगे. कोर्ट ने कहा कि सांप्रदायिक संघर्ष की स्थिति में आप यह नहीं मान सकते है कि केवल एक समुदाय के लोग ही इसका शिकार होते हैं.





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