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    मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में AFSPA को 6 महीने के लिए बढ़ाया गया

    मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में AFSPA को 6 महीने के लिए बढ़ाया गया







    We News 24 Hindi /  गौतम कुमार 


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम (AFSPA-1958) को 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय इन राज्यों में सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में अशांति और हिंसा की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. AFSPA के तहत सशस्त्र बलों को किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने, तलाशी लेने और यदि जरूरत पड़े तो गोलियां चलाने का अधिकार है. इस राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए यह शक्तियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, खासकर ऐसे वक्त में जब राज्य में अलग अलग उग्रवादी समूहों और अलगाववादी गतिविधियों का सामना किया जा रहा है.



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    कहाँ-कहाँ लागू हुआ AFSPA?

    1. मणिपुर

    पूरे राज्य में AFSPA लागू, लेकिन 5 जिलों के 13 थाना क्षेत्रों को छोड़कर।


    छूट प्राप्त क्षेत्र: इंफाल, बिश्नुपुर, थौबल, जिरिबाम और काकचिंग जिलों के कुछ हिस्से।


    2. अरुणाचल प्रदेश

    3 जिलों में AFSPA लागू:


    तिरप


    चांगलांग


    लोंगडिंग


    3 पुलिस थाना क्षेत्र भी शामिल।


    3. नगालैंड

    8 जिलों में AFSPA पुनः लागू:


    दीमापुर


    निउलैंड


    चुमौकेदिमा


    मोन


    किफिर


    नोकलाक


    फेक


    पेरेन



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    AFSPA क्या है?

    पूरा नाम: Armed Forces (Special Powers) Act, 1958


    उद्देश्य: सैन्य बलों को अशांत क्षेत्रों में विशेष अधिकार देना, ताकि वे आतंकवाद और उग्रवाद से प्रभावी ढंग से निपट सकें।


    मुख्य प्रावधान:


    सुरक्षा बलों को बिना वारंट गिरफ्तारी और गोलीबारी का अधिकार।


    कानूनी सुरक्षा: सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी।


    क्यों बढ़ाया गया AFSPA?

    मणिपुर: मेइतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी हिंसा और अशांति।


    नगालैंड: नागा विद्रोही गतिविधियों की रोकथाम के लिए।


    अरुणाचल प्रदेश: सीमावर्ती अशांति और उग्रवादी घुसपैठ को नियंत्रित करने के लिए।


    विरोध और चिंताएँ

    मानवाधिकार संगठन AFSPA को अत्यधिक कानून मानते हैं, क्योंकि इसके तहत सैन्य बलों को मनमानी की छूट मिलती है।


    नागरिक समाज का कहना है कि इससे निर्दोष लोगों के अधिकारों का हनन होता है।


    निष्कर्ष

    सरकार का मानना है कि उत्तर-पूर्व में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए AFSPA जरूरी है। हालाँकि, इस कानून को लेकर सुरक्षा बनाम मानवाधिकार की बहस जारी है। अगले 6 महीने में स्थिति की फिर से समीक्षा की जाएगी।


    स्रोत: गृह मंत्रालय, भारत सरकार। 

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