आगरा में आया कुदरत का नीला चमत्कार: 10 ग्राम का ब्लूथ्रोट, 10हजारकिमी उड़कर पहुंचा ताजनगरी
We News 24 :डिजिटल डेस्क » राजकुमार चौहान
आगरा, 29 नवंबर 2025. ब्लूथ्रोट पक्षी कुदरत की अनोखी बनावट और जीने की ज़बरदस्त इच्छा का एक बेहतरीन उदाहरण है। सिर्फ़ 10 ग्राम का छोटा सा शरीर, 12-14 सेमी की लंबाई… और हौसला इतना कि 10,000 किलोमीटर का सफर बिना रुके तय कर ले! यह है ब्लूथ्रोट – कुदरत का जीता-जागता चमत्कार। हर साल सितंबर आते ही साइबेरिया, अलास्का और उत्तरी चीन से ये नीले गले वाले नन्हे मेहमान आगरा की नम भूमियों में डेरा डालते हैं और अप्रैल तक यहीं डेरा जमाए रखते हैं।
आगरा कॉलेज ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रो. अमिता सरकार बताती हैं, “यह ओल्ड वर्ल्ड फ्लाईकैचर परिवार का सदस्य है। हिंदी में इसे नीलकंठी कहते हैं। दुनिया में इसकी 10 सब-स्पीशीज़ हैं, लेकिन भारत में जो आती है उसका वैज्ञानिक नाम Luscinia svecica है।”
फ्लाईकैचर फ़ैमिली का एक छोटा पक्षी, ब्लूथ्रोट, सितंबर से आगरा में डेरा डाले हुए है।
आगरा कॉलेज में ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रो. अमिता सरकार ने बताया कि दुनिया भर में ब्लूथ्रोट पक्षी की 10 सब-स्पीशीज़ पाई जाती हैं। यह ओल्ड वर्ल्ड फ्लाईकैचर फ़ैमिली का एक छोटा, गौरैया जैसा पक्षी है। हिंदी में इसे नीलकंठी कहते हैं। साइंटिफिक क्लासिफिकेशन के अनुसार, यह पक्षी ऑर्डर पासरिफॉर्मेस और फ़ैमिली मस्कीकैपिडे से जुड़ा है।
यह एक कीड़ा खाने वाला पैसेराइन पक्षी है।
यूनिवर्सिटी के ज़ूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रो. विश्वकांत गुप्ता के मुताबिक, यह एक कीड़ा खाने वाला पैसेराइन पक्षी है। भारत में इसका आना सितंबर से अप्रैल तक रहता है। माइग्रेशन के दौरान, इसे वेटलैंड्स, नहर के किनारे, धान के खेतों, नदी के किनारों और दलदली नमी वाली जगहों पर आसानी से देखा जा सकता है।
यह नदियों और दलदली नमी वाली जगहों पर घोंसला बनाता है।
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी एक्सपर्ट डॉ. के.पी. सिंह बताते हैं कि उत्तरी और उत्तर-पूर्वी भारत में पाई जाने वाली इस प्रजाति का साइंटिफिक नाम लुसिनिया स्वेसिका है। नर ब्लूथ्रोट की पहचान उसके गले पर गहरी नीली धारी और लाल-मैरून पैच से होती है, जबकि मादा के गले का पैटर्न हल्का होता है। यह पक्षी पश्चिमी अलास्का, रूस में साइबेरिया और उत्तरी चीन के बायोजियोग्राफिक इलाकों में ब्रीड करता है। वहां से यह सेंट्रल एशियन फ्लाईवे से उड़कर भारतीय सबकॉन्टिनेंट में आता है और आगरा समेत उत्तर भारत के शहरों को अपना सर्दियों का घर बनाता है।
बर्डवॉचर्स के लिए अच्छी खबर – इस साल ब्लूथ्रोट की संख्या पिछले साल से ज्यादा आई है। कई फोटोग्राफर्स सुबह 6 बजे से ही कैमरा लेकर घाटों पर डेरा डाले रहते हैं।
तो इस सर्दी अगर आप आगरा आएं तो ताजमहल के साथ-साथ इस नीले गले वाले नन्हे मेहमान को भी जरूर देखिए। यहाँ की सर्दी का सबसे खूबसूरत तोहफा है!
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