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    दिल्ली दंगा मामला: पांच साल से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं,पांच अन्य को मिली राहत


    दिल्ली दंगा  मामला: पांच साल से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं,पांच अन्य को मिली राहत


    We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️✍️ कोर्ट रिपोर्ट | अभिनव त्रिपाठी

    वी न्यूज 24 | सुप्रीम कोर्ट ब्यूरो 


    नई दिल्ली। 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित ‘साजिश’ मामले में करीब पांच साल से जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी। शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

    हालांकि, इसी मामले में अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को जमानत देने का आदेश दिया है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।


    क्या था मामला

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
    इससे पहले 10 दिसंबर 2025 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।




    अदालत की पीठ और कानूनी आधार

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने की।
    दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों की रिहाई का विरोध करते हुए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम – UAPA का हवाला दिया।

    पुलिस का तर्क था कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित साजिश से जुड़ा है, इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती।


    कौन-कौन पेश हुआ अदालत में

    दिल्ली पुलिस की ओर से

    • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता
    • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू

    ने अदालत में पक्ष रखा।

    वहीं आरोपियों की ओर से

    • कपिल सिब्बल
    • अभिषेक मनु सिंघवी
    • सिद्धार्थ दवे
    • सलमान खुर्शीद
    • सिद्धार्थ लूथरा

    जैसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलीलें पेश कीं।

    दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया।




    कानूनी और राजनीतिक असर

    उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने को UAPA से जुड़े मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
    वहीं, पांच अन्य आरोपियों को मिली जमानत से यह भी संकेत मिला है कि अदालत ने हर आरोपी की भूमिका को अलग-अलग आधार पर परखा।


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