‘ग्रीन फाइल’ से हिली बंगाल की सियासत: ममता बनाम ED की जंग में 2026 चुनाव से पहले बड़ा सियासी तूफान
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️रिपोर्ट: सुनील चटर्जी | कोलकाता
कोलकाता। बंगाल की राजनीति के केंद्र में इन दिनों एक ही रंग की चर्चा है— हरा। लेकिन यह तृणमूल कांग्रेस के झंडे का हरा नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में दिखी वह रहस्यमयी ‘ग्रीन फाइल’ है, जिसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सियासी भूचाल ला दिया है।
2026 के विधानसभा चुनाव में अब महज तीन-चार महीने ही बचे हैं और ठीक इसी वक्त प्रवर्तन निदेशालय (ED) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव खुली जंग में बदल चुका है। कोलकाता की सड़कों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस समय सिर्फ एक ही चर्चा है— ‘दीदी बनाम ईडी’।
👉इसे भी पढ़े- 10 मिनट डिलीवरी पर लगा ब्रेक! सरकार की सख्ती के बाद Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato ने बदली नीति
I-PAC छापे से भड़की सियासी आग
तृणमूल की चुनावी रणनीति संभालने वाली संस्था I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तरों पर पड़े ईडी के छापों ने राजनीति में आग लगा दी है। बंगाल का इतिहास गवाह है कि हर चुनाव से पहले कोई बड़ा धमाका जरूर होता है।
- 2016 में नारद स्टिंग
- 2021 से पहले कोयला और मवेशी तस्करी
- और अब 2026 के मुहाने पर I-PAC प्रकरण
लेकिन इस बार मामला पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और अभूतपूर्व है।
👉इसे भी पढ़े-पटना सिटी में दिनदहाड़े चाकूबाजी, 18 साल के युवक की मौत, दो गंभीर घायल — इलाके में दहशत
थ्रिलर फिल्म जैसा सीन
कोलकाता के लाउड स्ट्रीट में I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर और साल्टलेक स्थित ऑफिस में जब ईडी छापेमारी कर रही थी, तभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भारी सुरक्षा और नेताओं के काफिले के साथ वहां पहुंच गईं।
करीब 6 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद ममता एक लैपटॉप और वही चर्चित ‘ग्रीन फाइल’ लेकर बाहर निकलीं। यह नजारा किसी राजनीतिक थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था।
संवैधानिक टकराव आमने-सामने
ममता बनर्जी का साफ कहना है कि:
“भाजपा, ईडी के जरिए तृणमूल की 2026 की चुनावी रणनीति चुराना चाहती है।”
वहीं भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच में हस्तक्षेप कर कानून हाथ में लिया और सबूतों से छेड़छाड़ की। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने तो यहां तक कह दिया कि:
“ममता ने बंगाल को भारत के कानूनों से बाहर कर दिया है।”
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का इंतजार किए बिना सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी का आरोप है कि:
- कोयला तस्करी की काली कमाई के 20 करोड़ रुपये
- हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे
- और इन्हें 2022 के गोवा चुनाव में खर्च किया गया
उधर बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।
इधर, ममता की शिकायत पर कोलकाता और विधाननगर पुलिस ने ईडी अधिकारियों पर ही ‘डाटा चोरी’ की FIR दर्ज कर ली है।
👉इसे भी पढ़े-दिल्ली-NCR पर दोहरी मार: घना कोहरा + जानलेवा प्रदूषण, तापमान माइनस में पहुंचा, ट्रेन-फ्लाइट ठप
फायदा किसे होगा?
राजनीतिक गलियारों में अब एक ही सवाल है — इस टकराव से चुनावी फायदा किसे मिलेगा?
- भाजपा इसे भ्रष्टाचार और अराजकता का मुद्दा बना रही है
- माकपा भी सवाल उठा रही है कि “एक निजी कंपनी के लिए मुख्यमंत्री को सड़क पर उतरने की क्या जरूरत थी?”
- वहीं ममता इसे ‘बंगाल की अस्मिता पर हमला’ बताकर सहानुभूति बटोरने की रणनीति में जुटी हैं
2026 की दिशा यहीं से तय होगी
अगर ममता जनता को यह समझाने में सफल रहीं कि यह सब तृणमूल को हराने की साजिश है, तो उन्हें बड़ा फायदा हो सकता है। लेकिन अगर विपक्ष यह साबित कर सका कि ‘ग्रीन फाइल’ में भ्रष्टाचार के राज दफन हैं, तो 2026 की राह उनके लिए बेहद कठिन हो जाएगी।
फिलहाल, सबकी निगाहें हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और I-PAC की डिजिटल फाइलों पर टिकी हैं। वहीं से तय होगा कि बंगाल की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा।
धन्यवाद! हमें खुशी है कि आपने वी न्यूज 24 की खबरें पढ़ीं।
आपके विचार हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं! अगर आपको हमारी रिपोर्टिंग पसंद आई, या कोई सुझाव हो, तो नीचे कमेंट जरूर करें — आपकी राय हमें और बेहतर बनाने में मदद करेगी।
आप भी बन सकते हैं हमारे कम्युनिटी रिपोर्टर:
- अगर आपके आस-पास कोई ऐसी खबर, शिकायत या जनहित से जुड़ा मुद्दा है जिस पर सबकी नजर जानी चाहिए, तो हमें तुरंत व्हाट्सएप करें: 9599389900।हम उसे जांचेंगे और सबसे पहले, बेबाक अंदाज में आप तक पहुंचाएंगे।वी न्यूज 24 – सच्ची खबरें, बिना डर के। फॉलो करते रहें और जुड़े रहें
कोई टिप्पणी नहीं
कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद