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    🔥 बिहार बोर्ड 10वीं टॉपर: फैक्ट्री मजदूर के बेटे पवन कुमार ने रचा इतिहास! 483 अंकों के साथ राज्य टॉप-10 में जगह, सीतामढ़ी का गौरव

    फैक्ट्री मजदूर के बेटे पवन कुमार ने रचा इतिहास! 483 अंकों के साथ राज्य टॉप-10 में जगह, सीतामढ़ी का गौरव


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    Published on: 29 March 2026
    रिपोर्ट: पवन साह (लोकल संवाददाता, सीतामढ़ी)

    सीतामढ़ी, 29 मार्च 2026 – गरीबी और संघर्ष की कहानी को मेहनत ने एक बार फिर जीत दिलाई है। बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 के नतीजों में रुन्नीसैदपुर प्रखंड के माणिकचौक पश्चिमी गांव के पवन कुमार ने पूरे राज्य में तहलका मचा दिया। उन्होंने 483 अंक हासिल करके न सिर्फ सीतामढ़ी जिले में टॉप किया, बल्कि पूरे बिहार के टॉप-10 में अपनी जगह पक्की कर ली।


    पवन उच्च माध्यमिक विद्यालय, माणिकचौक पश्चिमी के छात्र हैं। उनके पिता शिवेश पंडित गुजरात की एक निजी फैक्ट्री में मजदूरी करके परिवार का गुजारा चलाते हैं, जबकि मां सुनीता देवी घर संभालती हैं। सीमित संसाधनों वाले साधारण परिवार में पलकर पवन ने स्वाध्याय और अनुशासन से यह मुकाम हासिल किया।



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    पवन ने बताया, “मैं रोजाना 8 से 10 घंटे नियमित पढ़ाई करता था। मोबाइल और अनावश्यक बातों से दूर रहकर सिर्फ अपने लक्ष्य पर फोकस रखा। ईमानदारी से मेहनत करने पर सफलता जरूर मिलती है।” उन्होंने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय माता-पिता को दिया और कहा कि पिता की मेहनत और मां का लगातार साथ उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।

    आईएएस बनने का सपना
    पवन का सपना बड़ा है। वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करके आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं और देश की सेवा करना चाहते हैं। उनकी यह सफलता न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे रुन्नीसैदपुर और सीतामढ़ी जिले के हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है। लोग कह रहे हैं – “झोपड़ी से भी टॉपर बन सकते हैं, बस मेहनत सच्ची होनी चाहिए।”


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    जिला शिक्षा विभाग और स्थानीय शिक्षकों ने भी पवन की तारीफ की है। स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षक उनकी लगन और फोकस को सराह रहे हैं। पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और पड़ोसी-रिश्तेदार पवन को बधाई देने पहुंच रहे हैं।

    यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में भी प्रतिभाएं छिपी हैं। संसाधनों की कमी हो तो क्या, सच्ची लगन और सही दिशा में मेहनत हर मुश्किल को पार कर सकती है।

    आपकी राय क्या है?
    क्या ऐसे टॉपर्स को सरकारी मदद और स्कॉलरशिप मिलनी चाहिए ताकि वे आगे और बेहतर कर सकें? या फिर आईएएस जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गांव स्तर पर कोचिंग सेंटर खुलने चाहिए? कमेंट में अपनी बात जरूर शेयर करें और इस प्रेरणादायक कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।


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