41 दिन में आया इंसाफ: डेढ़ साल के मासूम आरव के हत्यारे को फांसी, अदालत ने कहा—यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला
सब-हेडलाइन:
शिकोहाबाद में मासूम की निर्मम हत्या के दोषी विराज को मौत की सजा, CCTV और 13 गवाहों के आधार पर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
रिपोर्टर: अमित कुमार | We News 24 Digital Desk
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने महज 41 दिनों के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने शुक्रवार दोपहर 2:45 बजे सजा का ऐलान किया।
इस त्वरित फैसले को न्याय व्यवस्था की तेज कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने गुरुवार को आरोपी को दोषी ठहराया था और शुक्रवार को सजा सुनाई।
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एकतरफा प्रेम बना मासूम की हत्या की वजह
यह दिल दहला देने वाली घटना 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। सिरसागंज तहसील के गांव बामई निवासी रति अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ रह रही थीं। उनका अपने पति सुमित उर्फ प्रियंक से घरेलू विवाद चल रहा था और वह तलाक की प्रक्रिया में थीं।
अभियोजन के अनुसार, रति का फुफेरा देवर विराज उर्फ जितेंद्र पाठक, जो बदायूं के शेखुपुरा का निवासी है, रति पर शादी का दबाव बना रहा था। रति द्वारा अपने बेटे का हवाला देकर इनकार किए जाने से आरोपी नाराज था। इसी रंजिश में उसने मासूम आरव को जमीन पर कई बार पटककर उसकी हत्या कर दी।
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CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत
घटना का सीसीटीवी फुटेज जांच का सबसे अहम साक्ष्य बना। फुटेज में आरोपी को मासूम बच्चे को कई बार जमीन पर पटकते हुए देखा गया। इस वीडियो ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
घटना के कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी।
छह दिन में चार्जशीट, 13 गवाहों की गवाही
शिकोहाबाद पुलिस ने तेजी से जांच पूरी करते हुए मात्र छह दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी व परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह प्रस्तुत किया गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि यह इतना जघन्य अपराध था कि घटना का वीडियो एक बार देखने के बाद दोबारा देखने का साहस किसी में नहीं था। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस ने इस मामले में त्वरित पैरवी सुनिश्चित की, जिससे न्यायालय ने भी शीघ्र सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
अदालत का सख्त संदेश
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अत्यंत जघन्य अपराध माना और कहा कि ऐसे अपराध में कठोरतम दंड ही न्यायसंगत है। फैसले को समाज में यह संदेश देने वाला माना जा रहा है कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले क्रूर अपराधों के प्रति कानून किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।
41 दिनों में आए इस फैसले ने त्वरित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश की है।
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