पीएम मोदी ने उठाया सवाल: क्या अब चौथी पार्टी से ऑडिट कराने की जरूरत?

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नई दिल्ली | स्थानीय रिपोर्टर: राहुल शर्मा
नई दिल्ली :- निर्माण और सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स में क्वालिटी से जुड़ी लगातार आ रही खबरों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों से सीधा सवाल किया — क्या अब हमें चौथी पार्टी से ऑडिट कराने की जरूरत पड़ गई है?
मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई मासिक प्रगति बैठक की अध्यक्षता करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि काम की क्वालिटी का थर्ड-पार्टी ऑडिट तो आम बात है, लेकिन लगता है कि यह उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे रहा। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी स्थिति मंजूर नहीं की जा सकती और सिस्टम इस तरह काम नहीं करेगा।
पीएमओ के आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि काम की रफ्तार के साथ-साथ क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और क्रियान्वयन एजेंसियों से आधुनिक तकनीक अपनाने तथा हर स्तर पर क्वालिटी की गारंटी और निगरानी को मजबूत करने का आह्वान किया।
छह बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा
बैठक में पीएम मोदी ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र के छह महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा भी की। ये प्रोजेक्ट नौ राज्यों में फैले हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग पैकेजों में बांटकर देखने के बजाय एक एकीकृत सिस्टम के रूप में देखा और मॉनिटर किया जाना चाहिए।
बिजली क्षेत्र के एक प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, जब तक उसके लिए आवश्यक ट्रांसमिशन क्षमता न हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नहरें बनाए बिना बांध बनाना मनचाहा नतीजा नहीं देता।
प्रधानमंत्री के इन निर्देशों से साफ है कि केंद्र सरकार अब क्वालिटी कंट्रोल को और सख्ती से लागू करने पर जोर दे रही है, ताकि सार्वजनिक धन का सही इस्तेमाल हो और प्रोजेक्ट्स लंबे समय तक टिकाऊ रहें।
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