नेपाल बाढ़ ने ताजा कीं चीन के बानचियाओ बांध हादसे की यादें ,टूटे थे 62 बांध ,गईं लाखों जानें

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नई दिल्ली | स्थानीय रिपोर्टर: दीपक वर्मा
नेपाल में भोटे कोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने करीब पांच दशक पुराने चीन के बांध हादसे की यादें ताजा कर दी हैं। अगस्त 1975 में चीन के हेनान प्रांत में बानचियाओ बांध टूटने से ऐसी तबाही मची थी, जिसे आज भी दुनिया की सबसे घातक बाढ़ आपदाओं में गिना जाता है।
बहुत कम लोगों को पता होगा कि यह बांध उस समय चीन की नदियों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता था और सोवियत इंजीनियरों की मदद से इसे फिर से मजबूत भी किया गया था।
बानचियाओ बांध का इतिहास
बानचियाओ बांध को 1951-52 के दौरान रू नदी पर बनाया गया था। इसका इस्तेमाल बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए होना था। कुछ वर्षों बाद बांध में दरारें सामने आईं, जिसके बाद 1955-56 में इसे सोवियत विशेषज्ञों की सलाह पर मजबूत किया गया। इसके बाद इसे ‘आयरन डैम’ यानी लोहे का बांध कहा जाने लगा।
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टाइफून नीना बनी वजह
चीन में आई भीषण बाढ़ का मुख्य कारण टाइफून नीना को बताया गया, जिसकी वजह से जोरदार बारिश हुई। 5 से 7 अगस्त 1975 के बीच लिंझुआंग में 1,605 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बानचियाओ में भी तीन दिनों के दौरान 1,422 मिलीमीटर बारिश हुई। सिर्फ 7 अगस्त को वहां 784 मिलीमीटर पानी बरसा।
भारी बारिश के कारण बांध में पानी आने की रफ्तार करीब 13,000 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच गई, जबकि इसकी निकासी क्षमता लगभग 1,700 घन मीटर प्रति सेकंड थी। लगातार बढ़ते दबाव के बीच 8 अगस्त की आधी रात के बाद बांध टूट गया।
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एक के बाद एक टूटे 62 बांध
बानचियाओ से करीब 32 किलोमीटर दूर शिमानतान बांध भी टूट गया। इसके बाद कई छोटे बांध एक के बाद एक ढह गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुल 62 बांध एक रात में टूटे थे।
बानचियाओ से निकला पानी छह घंटे में करीब 70.1 करोड़ घन मीटर तक पहुंच गया और बाढ़ का फैलाव 10 से 15 किलोमीटर तक हो गया। इस आपदा में शुरुआती तौर पर करीब 62,000 लोगों की जान गई, जबकि बाढ़ के बाद फैली भुखमरी और बीमारियों के चलते करीब एक लाख और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालांकि मृतकों के आधिकारिक आंकड़ों को लेकर पुष्टि नहीं की जा सकी है। बाद में चीन पर इस आपदा से होने वाली मौतों की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगा।
नेपाल की हालिया आपदा में भी ग्लेशियर टूटने और मलबे वाले बहाव ने इसी तरह की अचानक और विनाशकारी बाढ़ का रूप लिया है, जिसने पुरानी यादों को फिर से ताजा कर दिया है।
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