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    प्रशांत किशोर:किस तरह हो सकते हैं नीतीश के लिए फायदेमंद?

    बिहार /पटना/समाचार 


     बिहार पटना :चुनावी रणनीति बनाने का काम छोड़कर जब प्रशांत किशोर पिछले रविवार को जेडीयू में शामिल हुए तो नीतीश कुमार ने दो अहम बातें कही थीं। पहला यह कि वह भविष्य हैं। और दूसरा यह कि प्रशांत किशोर का पार्टी में शामिल होना मेरी व्यक्तिगत खुशी है। इन दोनों बयानों के कई मायने निकाले गए हैं। प्रशांत किशोर ऐसे समय में नीतीश कुमार से जुड़े हैं,जब वह कई मायनो में  वह उनके काम आ सकते हैं। नीतीश कुमार के लिए प्रशांत किशोर इन 5 मोर्चों पर फायदेमंद हो सकते हैं - 

    1 - नीतीश को नए चेहरे और आइडिया की जरूरत है 

    नीतीश की सुशासन वाली छवि गंभीर सवालों के घेरे में है। तेजस्वी यादव की अगुआई में विपक्ष मुजफ्फरपुर कांड से लेकर दूसरे लॉ ऐंड ऑर्डर के मामले में नीतीश पर लगातार सवाल उठा रहा है। शराबबंदी जैसे मामलों पर भी उन्हें अपने तेवर नरम करने पड़े। इनके बीच नीतीश को ऐसे नए आइडिया और उसे लागू करने के लिए चेहरे की जरूरत थी जो उनकी सुशासन वाली छवि को दोबारा स्थापित कर सके। इसमें प्रशांत किशोर अहम योगदान निभा सकते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सात निश्चय की परिकल्पना प्रशांत किशोर ने ही पेश की थी। 

    2- तमाम राजनीतिक दलों के बीच पहुंच 

    प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के बाद नीतीश को एक ऐसा दूत मिल गया है जिनकी पहुंच तमाम राजनीतिक दलों के बीच है। अगर गठबंधन दौर की वापसी होती है तो ऐसे समय क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ेगी और तब प्रशांत किशोर अहम भूमिका निभा सकते हैं। अभी आ रही खबरों के मुताबिक आम चुनाव में बीजेपी से अधिक से अधिक सीटें दिलाने में भी प्रशांत किशोर भूमिका निभा सकते हैं। 

    3 - युवा ब्राह्मण चेहरा 

    41 साल के प्रशांत किशोर बिहार के लिए नया नाम नहीं हैं। एक चुनाव रणनीतिकार के रूप में बिहार में उन्हें पहचान मिल चुकी है। अब जबकि वह जेडीयू लीडर के रूप में बिहार में उतरे हैं तो नीतीश कुमार को उम्मीद है कि उनका ब्राह्मण होना भी उनकी सोशल इंजिनियरिंग का हिस्सा हो सकता है। जेडीयू अपने दम पर बिहार में कभी मजबूत ताकत नहीं रही और इसके पीछे उसका सामाजिक विस्तार नहीं होना रहा है। ऐसे में प्रशांत उनकी नई सोशल इंजिनियरिंग का हिस्सा बन सकेंगे। प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के तुरंत बाद कांग्रेस ने भी अपने पुराने ब्राह्मण नेता मदन मोहन झा को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। 

    4 - मांझी प्रकरण के बाद भरोसेमंद की तलाश थी 

    2014 के आम चुनाव में बीजेपी से अलग होने के बाद मिली बड़ी हार के बाद जब नीतीश ने सीएम पद से त्यागपत्र दिया था, तब उन्होंने जीतन मांझी को अपनी गद्दी दी थी, लेकिन वह बहुत ही कड़वाहट भरा अनुभव रहा। मांझी बागी हो गए। तब से नीतीश को अपने करीब किसी विश्वासमंद की तलाश थी। हाल के दो सालों में नीतीश और प्रशांत के बीच व्यक्तिगत केमिस्ट्री भी बेहतर रही है और दोनों ने बहुत वक्त साथ गुजारा है। ऐसे में वह प्रशांत किशोर में विश्वास व्यक्त कर सकते थे। 

    5 - पार्टी विस्तार में योगदान 

    हाल के दिनों में नीतीश की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा रही है, अपनी पार्टी का विस्तार करना। वह बिहार के अलावा बाकी राज्यों में भी वहां के राजनीतिक दलों के साथ मिलकर अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं। इसमें के सी त्यागी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रशांत किशोर के जेडीयू में आने के बाद इसमें रणनीतिक धार आने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार प्रशांत किशोर और के सी त्यागी पार्टी के विस्तार में अपना अहम योगदान निभा सकते हैं।

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