दिल्ली में किसकी चलेगी केंद्र सरकार की या दिल्ली सरकार की ,इसपर सुप्रीम कोर्ट फैसला आज सुनाएगा
WAORS हिंदी न्यूज डेस्क »नई दिल्ली
नई दिल्ली :राजधानी सर्विसेज, अधिकारियों के तबादले व पोस्टिंग करने और एसीबी के गठन का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा या केंद्र सरकार के पास, इस पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ इस मामले सुबह 10.30 बजे अपना फैसला सुनाएगी। सभी पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने तीन माह पहले यानी एक नवंबर को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। पिछले सप्ताह दिल्ली सरकार के पीठ के समक्ष इस मसले को उठाते हुए मामले में जल्द फैसला देने का आग्रह किया था।
दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया था कि फैसला जल्द सुनाया जाए क्योंकि प्रशासन चलाने में कठिनाइयां हो रही है। पिछले साल संविधान पीठ ने अपना फैसला देते हुए कहा था कि दिल्ली में पुलिस, कानून व्यवस्था और भूमि को छोड़कर उप राज्यपाल दिल्ली सरकार के किसी अन्य कामकाज में दखल नहीं देंगे।
दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में 24 जनवरी को पेश होकर मामले में जल्द फैसला देने का आग्रह किया ता। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित कर रखा है, ऐसे में दिल्ली सरकार को प्रशासन में दिक्कत हो रही है। साथ ही जल्द फैसला सुनाने का आग्रह किया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने 7 फरवरी को भी पीठ के समक्ष जल्द फैसला देने का आग्रह किया था। तब पीठ ने कहा था कि अगले सप्ताह सुनाने की उम्मीद है।
संवैधानिक पीठ ने उपराज्यपाल के अधिकार को सीमित कर दिए थे
पिछले 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में दिल्ली में उपराज्यपाल के अधिकार को सीमित कर दिया था। संविधान पीठने कहा था कि उपराज्यपाल मंत्री परिषद के सलाह से काम करेंगे। संविधान पीठ ने कहा था कि उपराज्यपाल स्वतंत्र तौर पर काम नहीं करेंगे, यदि कोई अपवाद है तो वह मामले को राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और उस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति लेंगे। इस पर सभी को अमल करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि सर्विसेज और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) जैसे मसलों पर अभी भी गतिरोध कायम है। इस बारे में 10 जुलाई को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कीथी।
पिछले 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में दिल्ली में उपराज्यपाल के अधिकार को सीमित कर दिया था। संविधान पीठने कहा था कि उपराज्यपाल मंत्री परिषद के सलाह से काम करेंगे। संविधान पीठ ने कहा था कि उपराज्यपाल स्वतंत्र तौर पर काम नहीं करेंगे, यदि कोई अपवाद है तो वह मामले को राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और उस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति लेंगे। इस पर सभी को अमल करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि सर्विसेज और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) जैसे मसलों पर अभी भी गतिरोध कायम है। इस बारे में 10 जुलाई को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कीथी।
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क्या है मामला
दरअसल, गृह मंत्रालय ने 21 मई 2015 को अधिसूचना जारी कर सेवा मामला, पुलिस, भूमि से जुड़े मामले को उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में डाल दिया। इसमें नौकरशाहों के सेवा का मामला भी शामिल है। इससे पहले केंद्र सरकार ने 23 जुलाई 2014 को अधिसूचना जारी कर दिल्ली सरकार की कार्यकारी अधिकार को सीमित कर दिया था। साथ ही दिल्ली सरकार के एसीबी का अधिकार क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधिकारियों तक सीमित किया था। केंद्र सरकार ने एसीबी के जांच के दायरे से केंद्र सरकार व इससे जुड़े संस्थानों के अधिकारियों को बाहर कर दिया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को झटका देते हुए उपराज्यापल को दिल्ली का प्रशासक बताया था।
Posted by:अंजली
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