अच्छी खबर ,भारत में सस्ती होगी डॉक्टर की पढ़ाई, सरकार ने लागू किए नियम
खबर का सार
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने शनिवार को जारी किए अपने नवीनतम दिशानिर्देशों में कहा कि निजी मेडिकल कालेजों में 50 फीसदी सीटों की फीस अब किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों के बराबर होगी। सरकारी कोटे की सीटें हासिल करने वाले छात्रों को यह लाभ मिलेगा
नई दिल्ली, एएनआई: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने निजी चिकित्सा संस्थानों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 फीसदी सीटों के संबंध में फीस और अन्य सभी शुल्कों के निर्धारण के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग ने शनिवार को जारी किए अपने नवीनतम दिशानिर्देशों में कहा कि निजी मेडिकल कालेजों में 50 फीसदी सीटों की फीस अब किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों के बराबर होगी।
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50 फीसदी सीटों पर लागू होगी सरकारी फीस
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि ‘व्यापक विचार-विमर्श के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि निजी मेडिकल कालेज और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 फीसदी सीटों की फीस उस राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों में शुल्क के बराबर होना चाहिए। इस शुल्क का लाभ पहले उन उम्मीदवारों को मिलेगा, जिन्होंने सरकारी कोटे की सीटों हासिल की है। लेकिन यह सीमा संबंधित मेडिकल कालेज या डीम्ड विश्वविद्यालय की कुल स्वीकृत सीटों की संख्या के 50 फीसदी तक ही सीमित होगी।
योग्यता के आधार पर भी मिलेंगी रिआयत
अधिसूचना में कहा गया है कि यदि सरकारी कोटे की सीटें कुल स्वीकृत सीटों के 50 फीसदी से कम हैं। तो शेष उम्मीदवारों को सरकारी मेडिकल कालेज की फीस के बराबर शुल्क का लाभ मिलेगा, जो पूरी तरह से योग्यता के आधार पर होगा।
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चिकित्सा बिरादरी ने किया केंद्र के फैसले का स्वागत
- एएनआई से बात करते हुए, एम्स बीबीनगर के कार्यकारी निदेशक, डा विकास भाटिया ने कहा, "यह एक स्वागत योग्य फैसला है। क्योंकि यह मेधावी और योग्य छात्रों को वित्तीय बाधाओं में मदद करेगा। साथ ही ऐसे उम्मीदवारों के लिए अवसरों को बढ़ाया गया है। देश को सर्वश्रेष्ठ डाक्टरों की जरूरत है और यह एक अच्छा निर्णय है।"
- फैसले की सराहना करते हुए, डेंटल काउंसिल आफ इंडिया (डीसीआई) के कार्यकारी सदस्य डा. अनिल चंदना ने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक लंबा समय था। यह एक सही दिशा में लिया गया सही फैसला है। इससे मेधावी छात्रों और समाज को बड़ा लाभ होगा। डीम्ड विश्वविद्यालय एक आसामान्य सी दिखने वाली फीस ले रहे थे। जो कि मध्यम वर्ग के छात्रों के बजट से परे थी, मेधावी छात्र जो इन उच्च शुल्क को वहन नहीं कर सकते, वे अब चिकित्सा क्षेत्र में अपने सपनों का पूरा कर सकते हैं।"
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