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    बैंक का फॉर्म भरने में मदद की, फिर निकाले सात लाख 44 हजार रुपये, तीन गिरफ्तार

     


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    We News 24 Digital»संवाददाता कविता चौधरी 

    नई दिल्ली। रोहिणी जिले की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे गैंग के तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक महिला की पहले मदद की,फिर उसी के खाते से सात लाख 44 हजार रुपये निकाल लिये। जिसके बारे में महिला को पता भी नहीं चल पाया। आरोपितों की पहचान आनंदपुर धाम, कराला निवासी सतीश,नितेश और परवेश के रूप में हुई है। आरोपितों के कब्जे से ठगी गई रकम में से तीन लाख 94 हजार रुपये,बाइक, दो मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है।

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    डीसीपी प्रणव तयाल ने सोमवार को बताया कि रोहिणी साइबर थाना पुलिस को महिला शिकायतकर्ता गांव मोहम्मदपुर माजरी में रहने वाली कांता देवी से बैंक से सात लाख 44 हजार रुपये निकलने की शिकायत मिली थी। जिसमें उन्होंने बताया कि उसका एसबीआई बैंक में खाता है।


    बीते अप्रैल महीने में वह बैंक बुक में एंट्री करवाने के लिये गई थी। जिसमें पता चला कि उसके खाते से सात लाख 44 हजार रुपये निकले हैं। जबकि उसके पास एटीएम कार्ड तक नहीं है। इस मामले में बैंक अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। हारकर उसने पुलिस की मदद ली। महिला ने बताया कि उसके मोबाइल फोन रुपये निकलने तक का कोई मैसेज तक नहीं आया है। इतनी बड़ी रकम उसके खाते से कैसे निकल गई और इस बारे में बैंक के पास कोई जवाब नहीं है।

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    पुलिस ने मामला दर्ज किया। एसीपी ईश्चर सिंह की देखरेख में एसएचओ अजय दलाल के निर्देशन में एसआई मनीष कुमार कांस्टेबल अमित और विकास को आरोपियों को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया। बैंक अधिकारियों से पूछताछ करने पर पता चला कि एसबीआई से पता चला कि किसी ने शिकायतकर्ता के खाते में अपना नकली मोबाइल नंबर दर्ज कर लिया है और डेबिट कार्ड के लिए आवेदन भी किया है और डाक के माध्यम से प्राप्त किया है। जिसके बाद तीनों को उनके ठिकानों पर छापेमारी कर गिरफ्तार कर लिया।

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    आरोपितों से पूछताछ करने पर पता चला कि वे शिकायतकर्ता को पिछले कुछ समय से जानते हैं। जोकि अकेली रहती हैं। उसने अपने बैंकिंग फॉर्म भरने में उनकी मदद ली थी। वे पहले ही शिकायतकर्ता के विश्वास पर जीत चुके थे। इसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ता को ठगने की साजिश रची। जब शिकायतकर्ता ने नई चेक बुक के लिए आवेदन करने के लिए आरोपित व्यक्तियों की मदद ली, तो उन्होंने अपना नकली मोबाइल नंबर पंजीकृत कर लिया और शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना नए डेबिट कार्ड के लिए आवेदन भी किया।

    इसके बाद, उन्होंने डाकघर से डेबिट कार्ड प्राप्त किया और एटीएम निकासी के माध्यम से शिकायतकर्ता के खाते से रुपये निकाल लिये थे।

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