धर्मांतरण के जाल में हिंदू-बौद्ध समाज: नेपाल-काठमांडू में जमाए बैठे हैं जापानी 'धर्मगुरु', पैसे और पद का लालच बन रहा हथियार, वीडियो
We News 24 Digital»रिपोर्टिंग सूत्र / काठमाडू संवादददाता
🕘 सोमवार, जुलाई 04, 2022 | ✍️ We News 24 Digital / काठमांडू संवाददाता
काठमांडू:
भारत और नेपाल जैसे धर्मनिरपेक्ष देशों में विदेशी संगठनों द्वारा धर्मांतरण की कोशिशें लगातार एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। We News 24 की पड़ताल में एक बार फिर जापानी कट्टरपंथी संगठन 'Nichiren Shoshu' की करतूतें सामने आई हैं। इस संस्था के कुछ जापानी पुरुष और महिलाएं बीते 5–7 सालों से काठमांडू में डेरा जमाए हुए हैं, और कथित तौर पर पैसे, पद और झूठे वादों के बल पर भोले-भाले लोगों को अपने धर्म में शामिल करवा रहे हैं।
🔍 मुख्य आरोप:
1. धार्मिक श्रेष्ठता का झूठा प्रचार
Nichiren Shoshu के प्रचारक हिंदू और बौद्ध धर्म को "गलत" और "हीन" बताकर अपने मत को सर्वश्रेष्ठ बताते हैं। यह धार्मिक सौहार्द को ठेस पहुंचाने वाला कार्य है।
2. प्रलोभन और धोखाधड़ी
इनके "लीडर" और "चीफ" स्थानीय लोगों को पैसे, पद और सुविधाओं का लालच देकर अपने साथ जोड़ते हैं। धर्मांतरण की प्रक्रिया को "समर्पण" और "अनुभव" के रूप में पेश किया जाता है।
3. वीजा और एम्बेसी का दुरुपयोग
यह विदेशी नागरिक भारत और नेपाल में बिज़नेस या टूरिस्ट वीज़ा लेकर प्रवेश करते हैं, लेकिन ग्राउंड पर उनका असली मकसद धार्मिक प्रचार और धर्मांतरण होता है।
4. प्रमाणपत्र बाँटना – धर्मांतरण की स्वीकृति का प्रतीक
वीडियो रिपोर्ट्स में देखा गया है कि Myokanko अध्यक्ष क्योतो ओकुसा (Kyoto Okusa) सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमाणपत्र बांटते हैं – ये प्रमाणपत्र उन लोगों को दिए जाते हैं जो कथित तौर पर Nichiren Shoshu के धर्म में शामिल हो चुके होते हैं।

कोह्जी ओह्कुरा देते हुए प्रमाण
⚠️ इन गतिविधियों के सामाजिक और कानूनी परिणाम:
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सांस्कृतिक अस्थिरता:
हिंदू-बौद्ध समुदायों में तनाव और विभाजन का माहौल बनता है।
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कानूनी उल्लंघन:
भारत और नेपाल दोनों देशों में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून हैं, जिनका उल्लंघन साफ तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है।
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विदेशी हस्तक्षेप:
एक विदेशी देश के नागरिक द्वारा स्थानीय धार्मिक ढांचे में दखल देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है।
सांस्कृतिक अस्थिरता:
हिंदू-बौद्ध समुदायों में तनाव और विभाजन का माहौल बनता है।
कानूनी उल्लंघन:
भारत और नेपाल दोनों देशों में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून हैं, जिनका उल्लंघन साफ तौर पर अपराध की श्रेणी में आता है।
विदेशी हस्तक्षेप:
एक विदेशी देश के नागरिक द्वारा स्थानीय धार्मिक ढांचे में दखल देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है।
✅ समस्या का समाधान क्या हो सकता है?
🔒 कानूनी निगरानी और कार्रवाई:
भारत और नेपाल की सरकारों को वीजा उल्लंघन करने वाले नागरिकों को चिन्हित कर तत्काल निष्कासित करना चाहिए।
💰 फंडिंग की जांच:
इन संगठनों को कहां से फंडिंग मिल रही है, कौन इनका समर्थन कर रहा है – इसकी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।
📢 धार्मिक संगठनों की भागीदारी:
हिंदू और बौद्ध संगठनों को जागरूकता फैलाने और इस तरह की गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए एकजुट होना चाहिए।
🧠 जनजागरूकता अभियान:
🌐 अंतरराष्ट्रीय समन्वय:
भारत और नेपाल की सरकारों को जापानी दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ समन्वय कर ठोस कदम उठाने होंगे।
🎯 हमारा संकल्प
We News 24 का एकमात्र उद्देश्य है – भारत और नेपाल की धार्मिक-सांस्कृतिक स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा। हम किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन धर्म के नाम पर छल, लालच और विदेशी दखल का विरोध करते हैं।
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🛡️ सतर्क रहें, सजग रहें — और यदि आपके आस-पास ऐसी गतिविधियाँ चल रही हैं तो हमें बताएं या प्रशासन को सूचना दें।
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