G20 Summit 2025: अमेरिकी बहिष्कार के बावजूद डिक्लेरेशन पास,अब धमकी या ताकत का नहीं होगा इस्तेमाल
We News 24 :डिजिटल डेस्क » मिडिया रिपोर्ट
नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025 :- जोहान्सबर्ग के नासरेक एक्सपो सेंटर में दुनिया के दिग्गज नेता इकट्ठा हुए थे, लेकिन हवा में तनाव का बादल मंडरा रहा था। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मंच से कहा, “यह अफ्रीका का पहला जी20 है – गरीबों की आवाज़ को सुनने का मौका।” लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनुपस्थिति ने सबकी भौंहें चढ़ा दीं। ट्रंप ने इसे “पूरी शर्मनाक” बताते हुए बहिष्कार किया, और उनके बाद अर्जेंटीना के प्रेसिडेंट जेवियर माइली ने भी कदम पीछे खींच लिया। फिर भी, बाकी 19 देशों ने एकजुट होकर संयुक्त घोषणापत्र पास कर दिया। एक फ्रेंच डिप्लोमैट ने बताया, “ट्रंप की कमी से हम मजबूत हुए। यह विकासशील दुनिया की जीत है।”
20वें जी20 शिखर सम्मेलन का फोकस था – जलवायु परिवर्तन, असमानता और शांति। घोषणापत्र में आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई, नस्ल-भाषा-धर्म आधारित भेदभाव रोकने की अपील की गई। लेकिन मुख्य संदेश – संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत कोई देश दूसरे की संप्रभुता पर हमला न करे। विशेषज्ञ इसे रूस (यूक्रेन), इजराइल (फिलिस्तीन), म्यांमार (रोहिंग्या) के लिए संदेश मान रहे हैं। रामाफोसा ने कहा, “हम फॉसिल फ्यूल से दूर रोडमैप बनाएँगे, 1.5°C लक्ष्य को बचाएँगे।”
अमेरिका का ऐतराज: 'G20 के सिद्धांतों का उल्लंघन'
अमेरिका ने घोषणापत्र पर कड़ी आपत्ति जताई। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा, “दक्षिण अफ्रीका ने अपनी अध्यक्षता का दुरुपयोग किया। जलवायु मुद्दे पर हमारी आपत्तियों को नजरअंदाज कर घोषणा जारी करना G20 के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।” ट्रंप अगले साल अमेरिका को होस्टिंग सौंपने को उत्सुक हैं, लेकिन उन्होंने साउथ अफ्रीका पर “व्हाइट जेनोसाइड” के झूठे आरोप लगाए। रामाफोसा ने पलटवार किया, “हमारी अध्यक्षता वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे लाई। अमेरिका की अनुपस्थिति से G20 रुका नहीं।” चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने भी शिखर छोड़ा, लेकिन प्रीमियर ली कियांग ने हिस्सा लिया।
वैश्विक चुनौतियों पर फोकस: गरीबी, जलवायु और शांति
घोषणापत्र में सुडान, डीआरसी, फिलिस्तीन और यूक्रेन में शांति प्रयासों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। दक्षिण अफ्रीका ने गरीब देशों के लिए जलवायु आपदा राहत, कर्ज माफी और ग्रीन एनर्जी फंडिंग पर जोर दिया। फ्रांस के मैक्रॉन ने कहा, “ट्रंप की कमी अफसोसजनक, लेकिन हमें रुकना नहीं।” ऑस्ट्रेलिया के अल्बनीज ने पेरिस समझौते को मजबूत करने की तारीफ की।
भारत की भूमिका: विकासशील दुनिया का चेहरा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर में अफ्रीकी विकास को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “G20 अब G7 नहीं, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ है।” भारत ने ग्लोबल साउथ के लिए क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन ट्रांजिशन पर सहयोग का वादा किया। लेकिन अमेरिकी बहिष्कार से सवाल उठे – क्या अगला G20 अमेरिका में 'ट्रंप इफेक्ट' से प्रभावित होगा?
ट्रंप की अनुपस्थिति ने जी20 को नई दिशा दी, लेकिन वैश्विक एकता का इम्तिहान भी। रामाफोसा ने समापन में कहा, “हमने परंपरा तोड़ी – घोषणा शुरुआत में ही पास की।” दुनिया देख रही – क्या ये संकल्प कागज पर रहेंगे, या असल बदलाव लाएँगे? शिखर खत्म, लेकिन बहस जारी।
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