Header Ads

ad728
  • Latest Stories

    रायपुर के खतरनाक मशरूम फैक्ट्री से 120 से ज्यादा बच्चे मुक्त, 6 साल से गुलामी में थे कई बच्चे

    रायपुर के खतरनाक मशरूम फैक्ट्री से 120 से ज्यादा बच्चे मुक्त, 6 साल से गुलामी में थे कई बच्चे




    We News 24 :डिजिटल डेस्क » ब्यूरो रिपोर्ट

    रायपुर, 19 नवंबर 2025 :- रायपुर में मशरूम बनाने की एक खतरनाक फैक्ट्री से बुधवार को 120 से ज्यादा बच्चे छुड़ाए गए। इनमें 80 लड़कियाँ और 40 लड़के शामिल हैं, जिनकी उम्र 14 से 17 साल के बीच है। ये बच्चे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड और असम के आदिवासी इलाकों से लाए गए थे और सालों से बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। कुछ बच्चे तो पिछले छह साल से इसी फैक्ट्री में कैद थे।

    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), महिला एवं बाल विकास विभाग, रायपुर पुलिस और NGO एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA) की संयुक्त टीम ने चार घंटे तक चले ऑपरेशन में बच्चों को मुक्त कराया।



    ठंड में 15 घंटे काम, खाना भी मुश्किल से मिलता था

    बचाए गए बच्चों ने बताया कि:

    वे फैक्ट्री के अंदर ही छोटे-छोटे गंदे कमरों में रहते थे

    रोज़ 12-15 घंटे तक काम करना पड़ता था

    ठंडे तापमान में बिना सुरक्षा उपकरण के तीन मंज़िला जाली पर चढ़कर मशरूम के पैकेट लटकाने पड़ते थे

    मिट्टी में फॉर्मेलिन जैसे कैंसर पैदा करने वाले खतरनाक केमिकल मिलाए जाते थे

    रात का खाना भी शायद ही कभी मिलता था



    ये भी पढ़े-दिल्ली-एनसीआर में ज़हरीली हवा: साँस लेना भी मुश्किल,एम्स के डॉक्टर बोले – “यह पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है”



    दूसरी बार पकड़ी गई वही फैक्ट्री

    चौंकाने वाली बात यह है कि यही Mojo Mushroom यूनिट इसी साल जुलाई में भी छापे में पकड़ी गई थी। उस वक्त भी कई मजदूर छुड़ाए गए थे, लेकिन मालिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही मजदूरों को मुक्ति प्रमाण-पत्र दिए गए। AVA ने लगातार निगरानी रखी और ठोस सबूतों के साथ फिर NHRC को सूचना दी, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई।

    “ये संगठित अपराध है, विकसित भारत के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा”

    जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन रिभु ने कहा:

    “कल्पना कीजिए, 14 साल का बच्चा ठंड में 15 घंटे काम कर रहा हो। यह मानव तस्करी का सबसे भयानक चेहरा है। NHRC सदस्य प्रियांक कनूनगो, DSP नंदिनी ठाकुर और AVA की टीम को बधाई। लेकिन असली जीत तभी होगी जब फैक्ट्री मालिकों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। जो अधिकारी पहले नाकाम रहे, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।”


    ये भी पढ़े- दिल्ली में घना कोहरा और प्रदूषण का दोगुना कहर: दक्षिण भारत में भारी बारिश, मध्य में शीतलहर की चेतावनी


    AVA के सीनियर डायरेक्टर मनीष शर्मा ने बताया:

    “बच्चे भूखे, चोटिल और डरे हुए थे। यह अस्थायी जीत है। जब तक मालिकों पर कड़ी से कड़ी सजा नहीं होगी, तब तक बाल मजदूरी और तस्करी नहीं रुकेगी।”

    फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। काउंसलिंग चल रही है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    बच्चों की यह चीख एक बार फिर देश को झकझोर रही है – क्या हम वाकई अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे पा रहे हैं?


    कोई टिप्पणी नहीं

    कोमेंट करनेके लिए धन्यवाद

    Post Top Ad

    ad728

    Post Bottom Ad

    ad728