6 पाकिस्तानी दैत्यों की बमबारी के बीच 26 साल के जांबाज ने तोडा पाकिस्तान का मनोबल, बचाया कश्मीर
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✍️न्यूज रिपोर्टर: विक्रम सिंह राठौर ,नई दिल्ली | 25 जनवरी 2026
नई दिल्ली, 25 जनवरी 2026 :- 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध वो दौर था जब मातृभूमि की रक्षा के लिए जवान हंसते-हंसते शहादत देने को तैयार थे। इसी जंग में भारतीय वायुसेना के 26 साल के युवा फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों ने ऐसा कारनामा किया, जिसकी मिसाल आज भी हर देशभक्त के दिल में बस्ती है। श्रीनगर एयरबेस पर तैनात सेखों ने जब पाकिस्तान के 6 भयंकर फाइटर जेट्स को देखा, जो बम और गोलों की बारिश कर रहे थे, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए नन्हे लेकिन घातक फोलैंड ग्नेट विमान से आसमान में छलांग लगा दी।
दुश्मन के दैत्यों को ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया कि वे पीछे हटने को मजबूर हो गए। इस हवाई युद्ध में निर्मलजीत सिंह सेखों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश के ताज – कश्मीर – को दुश्मन की चपेट से बचा लिया। इस अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। वे भारतीय वायुसेना के पहले और अब तक इकलौते ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें यह सर्वोच्च युद्धकालीन सम्मान मिला।
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सेखों नंबर 18 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ से जुड़े थे, जो अपनी तेज रफ्तार, सटीक निशाना और आक्रामक हमलों के लिए मशहूर थी। छोटे लेकिन जानलेवा ग्नेट फाइटर के साथ उन्होंने दुश्मन को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तानी पायलट भी उनकी बहादुरी की दाद देने लगे।
यह कहानी सिर्फ एक जांबाज की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की है जो मां भारती की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर देता है।
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