अलीगढ़ में 28 साल पुराना 'कब्रिस्तान' ध्वस्त, एडीए-प्रशासन का बुलडोजर ऑपरेशन, 12 करोड़ की अवैध कब्जा मुक्त जमीन पर लगा बोर्ड
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✍️ रिपोर्टर: रोहित सिंह
📍 अलीगढ़ | गुरुवार , 29 जनवरी 2026

अलीगढ़ : अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) की करीब 12 करोड़ रुपये मूल्य की एक बेशकीमती जमीन से 28 साल पुराना अवैध कब्जा आखिरकार समाप्त हो गया है। रामघाट रोड स्थित स्वर्ण जयंती नगर आवासीय योजना की इस 2420 वर्ग मीटर जमीन पर दशकों से चले आ रहे एक अवैध कब्रिस्तान को बुधवार को एडीए, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुलडोजर कार्रवाई करके साफ कर दिया। आठ घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद जमीन पर फिर से एडीए का स्वामित्व बोर्ड लगा दिया गया है।
यह मामला 1983 का है, जब एडीए ने स्वर्ण जयंती नगर योजना के तहत इस भूमि का अधिग्रहण किया था। हालाँकि, त्वरित निर्माण न हो पाने के कारण कुछ वर्षों बाद स्थानीय तत्वों ने इस पर कब्जा जमाकर इसे एक कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि राजस्व अभिलेखों में यह जमीन हमेशा से एडीए की संपत्ति के रूप में दर्ज रही, न कि कब्रिस्तान के रूप में।
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2013 में सपा शासनकाल में हुआ था 'विकास'
दिलचस्प बात यह सामने आई है कि वर्ष 2013 में, तत्कालीन सपा सरकार की कब्रिस्तान विकास योजना के तहत, इस अवैध रूप से कब्जायी गई जमीन पर ही बाउंड्रीवॉल और गेट बनवा दिए गए थे। इससे पहले 1997 में एडीए ने इस अतिक्रमण के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कराया था, लेकिन कब्जा हटाने में सफलता नहीं मिल पाई और मामला फाइलों में दबता चला गया।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि 2017 के बाद इस मामले ने फिर से रफ्तार पकड़ी। हाल ही में कुछ लोगों द्वारा शिकायत किए जाने पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया और मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जांच के आदेश दिए। तहसील स्तर पर गहन जांच और जीपीआर सर्वे के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जमीन पर किया गया कब्जा पूरी तरह से अवैध है।
आठ घंटे तक चली कार्रवाई, स्थानीय विरोध हुआ नाकाम
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे एडीए सचिव दीपाली भार्गव के नेतृत्व में एक भारी संयुक्त बल मौके पर पहुंचा। दो बुलडोजरों की मदद से सबसे पहले मुख्य दीवार और गेट गिराए गए, फिर चारों ओर से अतिक्रमण को हटाया गया। करीब आठ घंटे तक चले इस ऑपरेशन के दौरान कुछ स्थानीय लोगों और सपा से जुड़े पदाधिकारियों ने विरोध जताया। कुछ नेता कलक्ट्रेट पहुंचे भी, लेकिन प्रशासनिक टीम द्वारा समझाइश देने के बाद स्थिति शांत बनी रही और कार्रवाई पूरी हो सकी।
एडीए उपाध्यक्ष कुलदीप मीणा ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह जमीन हमेशा से एडीए की स्वामित्व वाली रही है। अभिलेखीय सबूत और तकनीकी सर्वे के बाद अवैध कब्जे को हटाने का निर्णय लिया गया। अब इस जमीन का उपयोग जनहित के मूल उद्देश्य के लिए किया जाएगा।"

इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी जमीन पर लंबे समय से चले आ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन की गंभीरता को रेखांकित किया है। हालांकि, विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि दशकों से चली आ रही एक धार्मिक परंपरा को बलपूर्वक समाप्त किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन करते हुए ही यह कदम उठाया गया है।
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