बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला जारी, एक और हिन्दू को जिंदा जलाया गया
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️रिपोर्ट: प्रतीक कुमार
वी न्यूज 24, नई दिल्ली/ढाका
1 जनवरी 2025
ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शरीयतपुर जिले में बुधवार (31 दिसंबर) को एक भीड़ ने 50 वर्षीय खोकोन दास पर हमला कर उन्हें जिंदा जला दिया। यह पिछले दो हफ्तों में हिंदू व्यक्तियों पर चौथा बड़ा हमला है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
क्या हुआ था शरीयतपुर में?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, खोकोन दास अपने घर जा रहे थे, जब रास्ते में एक भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया, बुरी तरह पीटा और फिर उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। दास की मौके पर ही मौत हो गई।
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स्थानीय निवासी और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता अनीसुर रहमान ने फोन पर बताया, "यह देखने लायक नहीं था। पूरा इलाका दहशत में है। हिंदू परिवार अपने घरों में दुबके हुए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज किया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।"
पिछले हफ्तों में हुए हमले
यह घटना बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हुए हाल के हमलों की एक कड़ी है:
- 18 दिसंबर: मयमनसिंह के भालुका में 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास को एक मुस्लिम सहकर्मी ने ईशनिंदा के झूठे आरोप में फंसाया। भीड़ ने उसे पीट-पीट कर मार डाला, शव को पेड़ से लटकाया और फिर आग लगा दी।
- 24 दिसंबर: कालीमोहर संघ के हुसैनडांगा इलाके में 29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला।
- 28 दिसंबर: बेजेंद्र बिस्वास नाम के एक हिंदू युवक को उसके सहकर्मी ने गोली मार दी।
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प्रतिक्रियाएं
इन हमलों के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग डरे हुए हैं। कई परिवारों ने अपने घर छोड़ने का फैसला किया है।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अध्यक्ष निम चंद्र भौमिक ने कहा, "हम सरकार से मांग करते हैं कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह हमलों का सिलसिला रुकना चाहिए।"
भारत ने भी इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हम बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के सामने लाने की उम्मीद करते हैं।"
सरकार का रुख
बांग्लादेश सरकार ने इन घटनाओं की निंदा की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्थानीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में कार्रवाई देरी से होती है और कई बार दोषी बच निकलते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इन घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भी चिंता जताई है। एक प्रवक्ता ने कहा, "हम बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक समुदायों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह करते हैं।"
क्या है पृष्ठभूमि?
बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 8% है। पिछले कुछ दशकों में विभिन्न कारणों से हिंदू आबादी का प्रतिशत लगातार घट रहा है। कभी-कभी राजनीतिक या सामाजिक तनाव के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले होते रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईशनिंदा के आरोप अक्सर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा का प्रावधान है।
आगे की राह
स्थानीय नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को न केवल कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि सामाजिक स्तर पर सद्भाव बढ़ाने के लिए भी कदम उठाने चाहिए। साथ ही, मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों को भी सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने में भूमिका निभानी चाहिए।
जब तक यह रिपोर्ट लिखी जा रही थी, बांग्लादेश पुलिस ने खोकोन दास के मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेने की बात कही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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