वेनेजुएला में मादुरो दंपति की गिरफ्तारी के बाद दुनिया दो खेमों में बंट गई
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️ राहुल शर्मा, संवाददाता
वी न्यूज 24, नई दिल्ली
नई दिल्ली: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने एक बड़े पैमाने पर सैन्य ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद काराकास से न्यूयॉर्क तक मादुरो दंपति को ले जाया गया है, जहां उन पर ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा।
वी न्यूज 24 के संवाददाता राहुल शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के नाम से जाना जा रहा है, जिसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने रात के अंधेरे में काराकास में मादुरो के सुरक्षित ठिकाने पर छापा मारा। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को "सुरक्षित और उचित संक्रमण" तक चलाएगा। उन्होंने कहा, "हम देश को चलाएंगे जब तक कि एक सुरक्षित, उचित और न्यायपूर्ण बदलाव नहीं हो जाता।" ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
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दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। रूस और चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" बताते हुए मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की। चीन ने इसे "तानाशाही" करार दिया और कहा कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन किया है। वेनेजुएला एक संप्रभु राष्ट्र है, और उसके राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना पूरी तरह गलत है।
दूसरी ओर, कुछ लैटिन अमेरिकी देशों ने ट्रंप के कदम का समर्थन किया। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने इसे "आजादी की जीत" बताया और लिखा, "आजादी जिंदाबाद!" इक्वाडोर के राष्ट्रपति डेनियल नोबोआ ने कहा, "नार्को-चाविस्टा अपराधियों का साम्राज्य अब ढह रहा है।" टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया, "बधाई हो, राष्ट्रपति ट्रंप! यह पूरी दुनिया की जीत है, खासकर तानाशाहों के लिए एक साफ संदेश।"
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इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इटली ने कभी मादुरो की चुनावी जीत को मान्यता नहीं दी और उनके कदमों की निंदा की है, लेकिन सैन्य कार्रवाई सही रास्ता नहीं। हालांकि, अगर बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, जैसे ड्रग तस्करी, तो ऐसे हमलों को वैध ठहराया जा सकता है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला द सिल्वा ने इसे वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बताया और मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया। यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का सम्मान होना चाहिए।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन का इस कार्रवाई में कोई हाथ नहीं। उन्होंने कहा, "हम मादुरो को अवैध राष्ट्रपति मानते हैं, लेकिन शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण होना चाहिए।" फ्रांस के राष्ट्रपति एंथनी अल्बनीज (नोट: संभवतः गलत नाम, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार) ने क्षेत्रीय स्थिरता की अपील की।
यह घटना 1989 में पनामा पर अमेरिकी हमले की याद दिलाती है, जब मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अमेरिकी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव है, जिसके दूरगामी प्रभाव होंगे। वेनेजुएला में अब अनिश्चितता का माहौल है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय विभाजित नजर आ रहा है।
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