🚨 दिल्ली में ना साफ पानी, ना साफ हवा, पुराने अस्पताल बन गया नया ‘आयुष्मान मंदिर’! खुल गया फर्जी विकास का खेल ?
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✍️सीनियर रिपोर्टर: अदीपक कुमार
📍 नई दिल्ली ,छत्तरपुर,कटवारिया सराय | सोमवार , 26 जनवरी 2026
नई दिल्ली :- दिल्ली में बीजेपी की रेखा सरकार के सत्ता में आते ही जिस “विकास मॉडल” की बातें की जा रही थीं, उसकी हकीकत अब धीरे-धीरे जनता के सामने आने लगी है। ताजा मामला दक्षिणी दिल्ली के कटवारिया सराय इलाके का है, जहां एक पुराने डिस्पेंसरी को सिर्फ रंग-रोगन करके “नया आयुष्मान मंदिर” बताकर पेश किया जा रहा है।
हकीकत ये है कि इस बिल्डिंग का उद्घाटन पहले ही 9 अप्रैल 2025 को MCD के मेयर महेश खींची द्वारा “महिला एवं शिशु कल्याण केंद्र” के रूप में किया जा चुका था। यानी न तो ये कोई नई बिल्डिंग है, न ही कोई नया अस्पताल।
अब उसी पुरानी इमारत पर नया बोर्ड लगाकर और थोड़ा पेंट-पॉलिश करके इसे “आयुष्मान मंदिर” के नाम से दोबारा उद्घाटन किया जा रहा है और जनता को ये दिखाने की कोशिश हो रही है कि दिल्ली में नई स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू की जा रही हैं।
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सवाल ये है — क्या सिर्फ नाम बदल देने से नया अस्पताल बन जाता है?
रेखा सरकार ने सत्ता में आते ही पिछली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक पूरी तरह बंद कर दिए और कहा कि उनकी जगह “आयुष्मान मंदिर” खोले जाएंगे। लेकिन ज़मीनी सच्चाई ये है कि न तो नए अस्पताल बन रहे हैं और न ही नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं — सिर्फ पुरानी इमारतों को री-पैकेज कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
दूसरी तरफ — दिल्ली की जनता को मिल रहा है नाले जैसा पानी
जहां एक तरफ सरकार कागजों और प्रचार में स्वास्थ्य क्रांति दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ छतरपुर, कटवारिया सराय और दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को बेहद गंदा, बदबूदार और काला पानी सप्लाई किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पानी न तो पीने लायक है और न ही नहाने या खाना बनाने लायक। इसके बावजूद शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
जनवरी में ही सूख गए नल, केजरीवाल सरकार में ये हाल अप्रैल-मई में होता था
हालात इतने खराब हैं कि जनवरी महीने में ही दिल्ली में पानी की भारी किल्लत देखने को मिली, जबकि पहले ये समस्या अप्रैल-मई की गर्मियों में होती थी। इससे साफ है कि जल प्रबंधन पूरी तरह फेल हो चुका है।
साफ है — ये विकास नहीं, सिर्फ प्रचार है
कटवारिया सराय का यह मामला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे “फर्जी विकास मॉडल” के जरिए जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है।
अब सवाल ये है कि क्या दिल्ली की जनता सिर्फ बोर्ड बदलने और फीता काटने की राजनीति से ही संतुष्ट हो जाएगी, या फिर वह असली सुविधाओं का जवाब मांगेगी?
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