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✍️न्यूज रिपोर्टर: अंशुमान त्रिपाठी
📍 सोनपुर रेल मंडल | सोमवार , 26 जनवरी 2026
देवभूमि उत्तराखंड में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सामने आने वाला है। श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने प्रस्ताव रखा है कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के अधिसूचित क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। इस मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार विचार कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
बीते दिनों हरिद्वार के डामकोठी में आयोजित एक कार्यक्रम में बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने यह बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आगामी अर्धकुंभ के मद्देनजर तीर्थ स्थलों की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। समिति के स्तर पर इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही सरकार को औपचारिक सिफारिश भेजी जाएगी।
किन क्षेत्रों में लगेगा प्रतिबंध?
प्रस्ताव के मुताबिक:
केदारनाथ क्षेत्र: पूरी केदारघाटी, जहां से यात्रा शुरू होती है, को प्रतिबंधित क्षेत्र में शामिल किया जा सकता है।
बदरीनाथ क्षेत्र: मंदिर परिसर और आसपास के अधिसूचित क्षेत्र का विस्तार कर प्रतिबंध लागू किया जा सकता है।
हरिद्वार की घाटियों पर भी नजर
श्री द्विवेदी ने हरिद्वार में गंगा के पवित्र घाटों (जैसे हर की पैड़ी) और अन्य प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों को चिह्नित करने की बात भी कही है। उनका सुझाव है कि जहां सनातन आस्था से जुड़े अनुष्ठान और धार्मिक गतिविधियां अधिक होती हैं, वहां प्रवेश व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "देवभूमि उत्तराखंड के सनातन स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार कृतसंकल्प है। चारधाम व हरिद्वार में हर की पैड़ी समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित करने से संबंधित प्रस्ताव सरकार के संज्ञान में आए हैं। इन पर विचार किया जा रहा है।" यह बयान इस ओर इशारा करता है कि सरकार इस प्रस्ताव को गंभीरता से ले रही है।
'लैंड जिहाद' कार्रवाई का हवाला
अपने बयान में हेमंत द्विवेदी ने पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा 'लैंड जिहाद' और अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वन और पर्वतीय इलाकों में अवैध कब्जे हटाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, और अब धार्मिक स्थलों की पवित्रता बचाने का समय आ गया है।
क्या है पृष्ठभूमि?
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, जहां चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) हिंदुओं की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक है। पिछले कुछ समय से स्थानीय धार्मिक नेता और संगठन यह मांग करते रहे हैं कि इन स्थलों की धार्मिक विशेषता बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर नियंत्रण होना चाहिए। आगामी अर्धकुंभ 2026 के चलते यह मुद्दा और गर्माया हुआ है।
अब आगे क्या?
अब नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां विशेष धार्मिक स्थलों पर प्रवेश धर्म के आधार पर प्रतिबंधित है। हालांकि, इस प्रस्ताव के कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ भी होंगे, जिन पर व्यापक बहस होने की उम्मीद है।
वी न्यूज 24 की विशेष रिपोर्ट
हमने इस मामले से जुड़े कई धार्मिक नेताओं और विशेषज्ञों से बात की है। कुछ का मानना है कि यह धार्मिक स्वायत्तता और आस्था की सुरक्षा का जरूरी कदम है, जबकि कुछ इसे धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हैं। इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा शुरू हो गई है।
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