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    दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार पहुंचा! 17 जनवरी को होगा ऐतिहासिक अभिषेक, हेलीकॉप्टर से बरसेगा जल

    दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार पहुंचा!  17 जनवरी को होगा ऐतिहासिक अभिषेक, हेलीकॉप्टर से बरसेगा जल


    We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️✍️वी न्यूज 24 के संवाददाता विकास सिंह की रिपोर्ट

    पूर्वी चंपारण। 5 जनवरी 2026 को उत्तरी बिहार में एक ऐतिहासिक और धार्मिक उत्साह का माहौल बन रहा है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लाया जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब बिहार पहुंच चुका है और 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया गांव में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया जाएगा।


    यह विशाल शिवलिंग 33 फीट ऊंचा, 33 फीट परिधि वाला और 210 मीट्रिक टन वजनी है। इसे एक ही ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से तराशा गया है, जिसमें करीब एक हजार छोटे सहस्त्रलिंग उकेरे गए हैं। निर्माण में करीब 10 साल लगे और इसकी लागत लगभग 3 करोड़ रुपये आई है। महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम स्वरूप का है, जो आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।



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    यात्रा और पहुंच


    शिवलिंग 21 नवंबर 2025 को महाबलीपुरम से 96 पहियों वाले विशेष ट्रक पर रवाना हुआ था। यह 2300-2500 किमी से ज्यादा की लंबी यात्रा तय कर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार पहुंचा। गोपालगंज में प्रवेश करने पर हजारों श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजे, पूजा-अर्चना और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया। गोपालगंज से यह खजुरिया, हुसैनी, केसरिया होते हुए कैथवलिया पहुंचेगा। रास्ते में जगह-जगह भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।


    17 जनवरी को स्थापना का कार्यक्रम


    17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी (नरक निवारण चतुर्दशी) के पावन अवसर पर शिवलिंग की पीठ पूजा, हवन और विधि-विधान से स्थापना होगी। पं. भवनाथ झा की देखरेख में पूजा होगी। ईशान-संहिता के अनुसार इसी तिथि पर शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी और पहली बार शिव की पूजा लिंग रूप में हुई थी।

    सबसे खास बात – हेलीकॉप्टर से जलाभिषेक होगा। अभिषेक के लिए पांच पवित्र स्थलों का जल मंगाया गया है:

    • हरिद्वार
    • प्रयागराज
    • गंगोत्री
    • कैलाश मानसरोवर
    • सोनपुर


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    इसके अलावा हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी होगी। चारों वेदों के विद्वान यज्ञ में शामिल होंगे। स्थापना के बाद भोजन-प्रसाद वितरण होगा। ध्यान रहे, पूर्ण प्राण प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद होगी (2030 तक लक्ष्य)।


    विराट रामायण मंदिर की खासियत


    यह मंदिर पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे महावीर मंदिर न्यास समिति बना रही है। 120-140 एकड़ में फैला यह मंदिर 270 फीट ऊंचा मुख्य शिखर वाला होगा – अंकोरवाट से भी बड़ा। इसमें 18 शिखर, 22 मंदिर, 20,000 लोगों की क्षमता वाला हॉल और चार आश्रम होंगे। रामायण काल की पूरी कहानी यहां दिखाई जाएगी।


    मोतिहारी/केसरिया: यह घटना बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी। श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और पूरा इलाका भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। स्थापना समारोह को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।


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