पूर्वी चंपारण कथवलिया पहुँचा दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग,इतिहास का गवाह बना चंपारण, गूंजे हर-हर महादेव के नारे
We News 24 : डिजिटल डेस्क »✍️✍️ रिपोर्ट: मुकेश कुमार,वी न्यूज 24
स्थान: कथवलिया, पूर्वी चंपारण (बिहार)
कथवलिया (कैथवलिया), पूर्वी चंपारण, बिहार। पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित कैथवलिया गांव की धरती सोमवार की रात इतिहास की साक्षी बनी, जब विराट रामायण मंदिर, कथवलिया के लिए तैयार किया गया दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग बीती रात ठीक 11 बजकर 25 मिनट पर गांव की सीमा में प्रवेश कर गया।
“ई त इतिहास बन रहल बा।”
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुआ निर्माण
सूत्रों के अनुसार, यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्प केंद्र महाबलीपुरम में तैयार किया गया है। इसे पारंपरिक शिल्प कला और आधुनिक तकनीक के संयोजन से आकार दिया गया है।
कितना विशाल है यह शिवलिंग? (आकार और वजन)
मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस शिवलिंग की विशेषताएं इस प्रकार हैं—
- ऊँचाई: लगभग 33 फीट
- व्यास (चौड़ाई): करीब 18 से 20 फीट
- वजन: लगभग 210 मीट्रिक टन
- निर्माण सामग्री: एक ही विशाल ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर
- (Single Monolithic Stone)
निर्माण में लगे 10 वर्ष, लागत लगभग 3 करोड़ रुपये
सूत्रों के मुताबिक—
- निर्माण अवधि: करीब 10 वर्ष
- निर्माण लागत: लगभग 3 करोड़ रुपये
(कुछ रिपोर्टों में कुल 8-10 करोड़ तक बताई गई, जिसमें परिवहन शामिल हो सकता है)।
लंबे समय तक चले इस निर्माण कार्य में अनुभवी शिल्पकारों की टीम लगी रही। शिल्प, संतुलन और मजबूती—तीनों पर विशेष ध्यान दिया गया।
96 पहियों वाले ट्रक से 2300–2500 किमी की यात्रा
इस दौरान शिवलिंग ने—
करीब 2300 से 2500 किलोमीटर से अधिक की इस यात्रा को पूरा करना अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती माना जा रहा है।
“ई साधारण मूर्ति ना ह” — ट्रस्ट सदस्य
मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य ने कहा—
“ई साधारण मूर्ति ना ह, ई हजारों साल चले वाला आस्था के प्रतीक ह।”
परिवहन और सुरक्षा पर अलग से खर्च
सूत्रों के अनुसार—
- परिवहन और सुरक्षा खर्च: अलग से करोड़ों रुपये
- विशेष क्रेन, ट्रेलर और इंजीनियरिंग सपोर्ट का इस्तेमाल किया गया
इतने भारी और विशाल शिवलिंग को सुरक्षित रूप से बिहार तक लाना एक बड़ा तकनीकी और प्रबंधनात्मक कारनामा माना जा रहा है।
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शिवलिंग की प्रमुख विशेषताएं
इस शिवलिंग को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि—
-
यह एकल शिला से निर्मित है
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इसमें प्राकृतिक संतुलन (Natural Balance) का विशेष ध्यान रखा गया है
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भूकंप और मौसम के प्रभाव को झेलने के लिए विशेष डिजाइन
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सदियों तक क्षरण न हो, इसके लिए खास फिनिशिंग
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इसका आकार और भार विश्व में स्थापित किसी भी शिवलिंग से बड़ा बताया जा रहा है
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसे शिवलिंग को “स्वयंभू स्वरूप के समकक्ष” माना जाता है।
आधी रात का दृश्य: गांव जाग उठा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार—
“रात में नींद त उड़िए गईल। गाड़ी आवत देख लोग अपने-अपने मोबाइल निकाल लिहल। हर कोई वीडियो बनावे लागल। ई मौका रोज-रोज कहां मिलेला।”
सुरक्षा के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम पहले से तैनात थी। ट्रैफिक को नियंत्रित किया गया ताकि शिवलिंग को बिना किसी बाधा के मंदिर परिसर तक पहुंचाया जा सके।
चंपारण के लिए क्या मायने रखता है यह क्षण?
- धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- कथवलिया और आसपास के गांव राष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती से उभरेंगे
एक स्थानीय निवासी ने भावुक होकर कहा—
“अयोध्या, काशी के बाद अब चंपारण के नाम भी लोग जानिहें। ई गर्व के बात बा।”
आगे क्या?
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार—
वी न्यूज 24 का विश्लेषण
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