सिमडेगा गांधी मैदान पर अवैध कब्जों पर प्रशासन सख्त — नापी पूरी, जल्द जारी होगा नोटिस, चल सकता है बुलडोजर
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✍️रिपोर्ट: सीनियर पत्रकार ,दीपक कुमार
उपशीर्षक
- डीसी के निर्देश पर अंचल टीम की कार्रवाई
- सरकारी जमीन पर कब्जाधारियों की सूची तैयार
- रिपोर्ट के बाद नोटिस, फिर ध्वस्तीकरण की तैयारी
सिमडेगा के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। उपायुक्त के निर्देश पर सिमडेगा अंचल की टीम ने मैदान की विस्तृत नापी पूरी कर ली है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मैदान के आसपास कई जगहों पर सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण के प्रमाण मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नापी रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि नोटिस के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने वालों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है।
डीसी के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, गांधी मैदान पर लगातार मिल रही शिकायतों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। डीसी स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सरकारी भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए और अवैध कब्जों की पहचान कर रिपोर्ट तैयार की जाए।
इसके बाद अंचल कार्यालय की टीम ने राजस्व कर्मियों और नापी अमीन के साथ मौके पर पहुंचकर सीमांकन का काम शुरू किया।
नापी में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य
नापी के दौरान यह पाया गया कि मैदान की मूल परिधि से बाहर कई जगहों पर स्थायी और अस्थायी निर्माण किए गए हैं। इनमें कथित तौर पर दुकानें, शेड, बाउंड्री और निजी उपयोग के ढांचे शामिल हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कुछ कब्जे हाल के वर्षों में हुए हैं, जबकि कुछ पुराने अतिक्रमण भी रिकॉर्ड में सामने आए हैं।
रिपोर्ट तैयार, नोटिस की तैयारी
अंचल सूत्रों के अनुसार, नापी रिपोर्ट अब अंतिम चरण में है। जैसे ही रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को सौंपी जाएगी, अवैध कब्जाधारियों की सूची जारी की जाएगी।
इसके बाद संबंधित लोगों को विधिसम्मत नोटिस भेजे जाएंगे, जिसमें निर्धारित समय के भीतर खुद से अतिक्रमण हटाने का निर्देश होगा।
नहीं हटे कब्जे तो चलेगा बुलडोजर
सार्वजनिक स्थल होने से मामला संवेदनशील
गांधी मैदान शहर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल माना जाता है, जहां सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में इस पर अवैध कब्जों को लेकर नागरिकों में लंबे समय से नाराजगी थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो मैदान का मूल स्वरूप बचाया जा सकता था।
आम लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सरकारी जमीन को हर हाल में मुक्त कराया जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण शहर की पहचान और विकास दोनों के लिए खतरा है।
कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई निष्पक्ष हुई, तो इससे प्रशासन पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
प्रशासन का संदेश — सरकारी जमीन पर कोई समझौता नहीं
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यह कार्रवाई सिर्फ गांधी मैदान तक सीमित नहीं रह सकती। आने वाले समय में शहर के अन्य सरकारी भूखंडों की भी जांच हो सकती है।
अधिकारियों का मानना है कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण मुक्त अभियान को लेकर सख्त संदेश देना जरूरी है।
आगे क्या?
- नापी रिपोर्ट जल्द डीसी को सौंपी जाएगी
- कब्जाधारियों को नोटिस जारी होगा
- समयसीमा तय की जाएगी
- जरूरत पड़ी तो बुलडोजर कार्रवाई
अब सभी की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है।
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