बच्ची लापता मामले में हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद हड़कंप, डीजीपी तदाशा मिश्रा ने गुमला में जांच का लिया जायजा
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वी न्यूज 24 | गुमला
रिपोर्टर: रितेश कुमार
गुमला: झारखंड के गुमला जिले के खोरा गांव से साल 2018 में लापता हुई तत्कालीन 13 वर्षीय बच्ची (अब उम्र 21 वर्ष) के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। लंबे समय से इस मामले में कोई ठोस सुराग न मिलने पर झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस जांच की धीमी रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट के सख्त रुख के बाद राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा खुद गुमला पहुंच गईं।
कोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट, सीबीआई जांच के संकेत
हाईकोर्ट में हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस मामले की सुस्त जांच पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने राज्य की डीजीपी और गुमला एसपी से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। साथ ही साफ संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई तो इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी। कोर्ट के इस सख्त तेवर ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
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डीजीपी ने परिजनों से की घंटों पूछताछ
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा ने स्वयं मामले की गंभीरता को समझते हुए गुमला का दौरा किया। सर्किट हाउस में उन्होंने सबसे पहले स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर अब तक की जांच की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने लापता बच्ची के परिजनों को बुलाकर बंद कमरे में करीब दो घंटे तक विस्तृत पूछताछ की। इस दौरान डीजीपी ने परिजनों से हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
जांच का होगा फिर से रिव्यू, नए सिरे से छानबीन शुरू
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस दौरान कहा कि पुलिस इस मामले में लगातार काम कर रही है और अब तक कई पहलुओं पर जांच की जा चुकी है, लेकिन दुर्भाग्य से कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अब पूरे मामले का फिर से रिव्यू किया जाएगा और हर एंगल से नए सिरे से जांच को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा हो सके।
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गार्ड ऑफ ऑनर से किया गया डीजीपी का स्वागत
बता दें कि गुमला पहुंचने पर डीजीपी तदाशा मिश्रा को सर्किट हाउस में पुलिस की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। फिलहाल डीजीपी के इस दौरे के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और अधिकारी जांच में तेजी लाने में जुट गए हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या दो सप्ताह के भीतर पुलिस इस मामले में कोई ठोस सुराग जुटा पाती है या फिर यह केस सीबीआई को ट्रांसफर हो जाता है।
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