सीतामढ़ी नगर में डस्टबिन-शौचालय ड्रेनेज गायब, लेकिन मेयर परिवार के नाम ‘इस्लाम परवेज द्वार’ पर करोड़ों खर्च – क्या विकास या भ्रष्टाचार का अड्डा?
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21 अप्रैल 2026
सीतामढ़ी: सीतामढ़ी नगर निगम एक बार फिर विवादों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों का आरोप है कि पूरे बिहार में शायद ही कोई दूसरा नगर निगम ऐसा हो जहां शहर में डस्टबिन और सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्था न हो। घूम-घूमकर देख लीजिए, गलती से भी आपको कहीं डस्टबिन या शौचालय नजर नहीं आएगा।
फिर भी मेयर रौनक जहां परवेज को ये सब नजर नहीं आता। लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का अड्डा ज्यादा सक्रिय है, जबकि विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं।
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बुनियादी सुविधाओं का भयानक अभाव
शहर की स्थिति और भी चिंताजनक है। ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह नाकाम है। दो-तीन महीने बाद बारिश का मौसम शुरू होते ही पूरा शहर पानी में डूब जाएगा। गलियों और मोहल्लों में पानी भर जाएगा, लोगों के घरों में बारिश का पानी घुस जाएगा और कई परिवार अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।
नगर निगम प्रशासन इस समस्या की कोई चिंता नहीं दिखा रहा है। वहीं मेयर के पति आरिफ मुखिया (आरिफ हुसैन परवेज) लोगों को चक्रवृद्धि ब्याज के साथ प्रॉपर्टी टैक्स देने के लिए धमकाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीतामढ़ी में पटना नगर निगम से भी ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में नागरिकों को मुलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
‘इस्लाम परवेज द्वार’ पर उठे सवाल
इन सभी समस्याओं को नजरअंदाज करते हुए मेयर रौनक जहां परवेज अपने परिवार के नाम पर इस्लाम परवेज द्वार का निर्माण करवा रही हैं। इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विपक्षी पार्षदों और पूर्व सभापति सुवंश राय समेत कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं।
लोग पूछ रहे हैं – क्या शहर में पहले डस्टबिन, शौचालय, साफ-सफाई और बेहतर ड्रेनेज की जरूरत है या परिवार के नाम पर भव्य द्वार की?
इस्लाम परवेज द्वार के निर्माण को लेकर सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं। कई स्थानीय लोग इसे प्राथमिकताओं की उलटी व्यवस्था बता रहे हैं।
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नागरिकों की नाराजगी
सीतामढ़ी के आम नागरिक अब काफी नाराज हैं। वे कहते हैं कि नगर निगम बुनियादी सुविधाएं देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। बारिश आने से पहले अगर ड्रेनेज की सफाई और सुधार नहीं किया गया तो शहर फिर से जलमग्न हो जाएगा और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय नागरिकों, पार्षदों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के आरोपों पर आधारित है। आगे की जांच और प्रशासनिक जवाब के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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