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    अद्भुतनाथ महादेव मंदिर, अन्हारी धाम (सीतामढ़ी) – आकाश से उतरा दिव्य शिवलिंग और अटूट श्रद्धा की कहानी


    अद्भुतनाथ महादेव मंदिर, अन्हारी धाम (सीतामढ़ी) – आकाश से उतरा दिव्य शिवलिंग और अटूट श्रद्धा की कहानी

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    वी न्यूज 24 | We News 24

    सीतामढ़ी, बिहार | 20 अप्रैल 2026

    वी न्यूज 24 के स्थानीय रिपोर्टर पवन साह के दीपक कुमार की रिपोर्ट।

    हर हर महादेव!

    बिहार के सीतामढ़ी जिले में, जहां माता सीता की पावन भूमि का आशीर्वाद बरसता है, वहां एक ऐसा अद्भुत शिव धाम है जो भक्तों की आस्था को नई ऊंचाई प्रदान करता है। जिला मुख्यालय से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अद्भुतनाथ महादेव मंदिर, जिसे लोकप्रिय नाम से अन्हारी धाम या अन्हारी मठ भी कहा जाता है, दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करने वाला एक पवित्र तीर्थ स्थल है।


    यहां सच्चे मन से बाबा अद्भुतनाथ से जो भी मांगा जाता है, वह अवश्य पूर्ण होता है। साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन मास, महाशिवरात्रि, बसंत पंचमी, अनंत चतुर्दशी और नवरात्रि के दौरान यहां भव्य मेला लगता है और अपार भीड़ उमड़ पड़ती है।


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    मंदिर का अलौकिक इतिहास

    जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अन्हारी गांव का पुराना नाम उजियारा था। सदियों पहले, माघ महीने के दोपहर में अचानक आकाश में भयंकर गर्जना हुई और चारों ओर घना अंधेरा छा गया। आसमान में तारे चमकने लगे। लोग इसे दैवीय प्रकोप मानकर घबरा गए।

    उसी रात कई लोगों को स्वप्न आया कि गांव के दक्षिण-पश्चिम भाग के जंगल में, उत्तर वाहिनी की पुरानी धार के निकट एक शिवलिंग आकाश मार्ग से गिरा है। इसका दूसरा हिस्सा निकटवर्ती रेवासी गांव के लक्ष्मीपुर टोले में गिरा था। ग्रामीणों ने दोनों टुकड़ों को लाकर जोड़ा और शिवलिंग की स्थापना की।


    तब से गांव का नाम उजियारा से बदलकर अन्हारी (अंधेरे वाला) पड़ गया। इस घटना को लेकर मंदिर को 736 वर्ष पुराना माना जाता है (13वीं शताब्दी के आसपास)। शिवलिंग आकाश मार्गी कहलाता है क्योंकि यह स्वयं आकाश से धरती पर अवतरित हुआ था।


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    मंदिर की विशेषताएं और वर्तमान स्वरूप


    मंदिर में स्थापित मुख्य शिवलिंग दो टुकड़ों को जोड़कर बना है – यह इसकी सबसे बड़ी अद्भुत विशेषता है।

    यहां बाबा अद्भुतनाथ महादेव के साथ मां पार्वती और अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा-अर्चना होती है।

    ग्रामीणों ने मंदिर के विकास के लिए भूमि दान दी है। एक समर्पित कमिटी मंदिर की देखभाल करती है।

    पुजारी रोजाना नियमित पूजा, आरती और भोग लगाते हैं।

    पूरे सावन मास में भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त शामिल होते हैं।


    पूर्व प्रमुख और मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद यादव के अनुसार, “इस इलाके के लोगों की बाबा अद्भुतनाथ के प्रति अगाध आस्था है। जो सच्चे दिल से मांगते हैं, उनकी मनोकामना बाबा अवश्य पूरी करते हैं।”




    त्योहार और मेलों का महत्व

    अन्हारी धाम में विशेष रूप से इन अवसरों पर भव्य आयोजन होते हैं:

    महाशिवरात्रि

    बसंत पंचमी

    अनंत चतुर्दशी

    श्रावण मास (सोमवारों पर विशेष जलाभिषेक और दिव्य आरती)

    नवरात्रि


    इन दिनों मंदिर सज-धज कर तैयार होता है, भंडारा समिति द्वारा भव्य प्रसाद वितरण किया जाता है और भक्तों की भारी भीड़ लगती है। सावन में जलाभिषेक और शाम की आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।


    कैसे पहुंचें अन्हारी धाम?


    स्थान: अन्हारी गांव, रीगा थाना क्षेत्र, सीतामढ़ी जिला, बिहार

    दूरी: सीतामढ़ी शहर से सिर्फ 8 किमी

    सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। स्थानीय वाहन या ऑटो उपलब्ध हैं।


    अद्भुतनाथ महादेव की जय!

    जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ यहां दर्शन करने आते हैं, उन्हें बाबा की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। यदि आप सीतामढ़ी या आसपास हैं तो एक बार जरूर इस पावन धाम के दर्शन करें।

    हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय!

    (यह लेख मूल जानकारी, जनश्रुतियों और स्थानीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। मंदिर दर्शन के समय मौसम और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।) 

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