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    सीतामढ़ी में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी ,DM के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों द्वारा किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की जबरन दुकानदारी

    सीतामढ़ी में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी ,DM के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों द्वारा किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की जबरन दुकानदारी


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    रिपोर्टर: सीनियर रिपोर्टर दीपक कुमार

    सीतामढ़ी | वी न्यूज 24
    दिनांक: 11 अप्रैल 2026


    सीतामढ़ी – जिले के निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी को लेकर अभिभावकों में गुस्सा फूट पड़ा है। आरोप है कि कई प्राइवेट स्कूल शिक्षा प्रदान करने के बजाय किताबों, कॉपियों, जूतों और यूनिफॉर्म की बिक्री को अनिवार्य बनाकर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।

    अभिभावकों का कहना है कि स्कूल अपनी तय दुकानों से ही सामान खरीदने का दबाव बनाते हैं और बाजार मूल्य से काफी ज्यादा कीमत वसूलते हैं। फीस के अलावा अलग-अलग मदों में खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर टूट रही है।

    सीतामढ़ी में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी ,DM के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों द्वारा किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी की जबरन दुकानदारी



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    अभिभावकों के मुख्य आरोप:

    1. स्कूल द्वारा नामित दुकानों से ही किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म और जूते खरीदना अनिवार्य
    2. बाजार की तुलना में 20-40% ज्यादा दाम वसूलना
    3. फीस के अलावा “स्टेशनरी चार्ज”, “ड्रेस चार्ज”, “बुक चार्ज” जैसे अलग-अलग नामों पर अतिरिक्त पैसे लेना
    4. मना करने पर बच्चों को क्लास में तंग करना या धमकाना

    अभिभावक पूछ रहे हैं – जब स्कूल पहले से ही भारी-भरकम फीस लेते हैं, तो फिर किताब और ड्रेस की दुकानदारी क्यों कर रहे हैं? क्या शिक्षा सेवा है या व्यापार?

    लोगों का मानना है कि निजी स्कूल सरकार की अनुमति और नियमों के तहत चलते हैं, इसलिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को इनकी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखनी चाहिए।

    अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्राइवेट स्कूलों की इस मनमानी पर तुरंत लगाम लगाई जाए और दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


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    सीतामढ़ी की जिला पदाधिकारी रिची पांडे ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निजी स्कूल अभिभावकों को अपनी मनमानी दुकानों से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।

    जिला अधिकारी के प्रमुख आदेश:

    1. कोई भी निजी विद्यालय अपने विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, पाठ्य पुस्तकें, कॉपियाँ या अन्य स्टेशनरी सामग्री केवल एक ही निर्धारित दुकान/विक्रेता से खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा
    2. सभी निजी विद्यालयों को 13 अप्रैल 2026 तक अपनी वेबसाइट पर किताबों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची (दर सहित) अपलोड करनी होगी और स्कूल परिसर में भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
    3. स्कूल प्रशासन द्वारा यूनिफॉर्म में अनावश्यक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

    अतिरिक्त निर्देश:

    1. बच्चों को बड़े भाई-बहन की पुरानी किताबों का उपयोग करने की अनुमति दी जाए।
    2. स्कूल आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों में सीसीटीवी, मेडिकल किट आदि सुरक्षा उपकरण अनिवार्य।
    3. RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

    जिला अधिकारी ने बिहार निजी विद्यालय (शुल्क) अधिनियम, 2019 की धारा-4(6) का हवाला देते हुए कहा कि स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से सामान खरीदने की अनिवार्यता पर सख्त प्रतिबंध है। उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।


    एक अभिभावक ने कहा,


    “शिक्षा सेवा है, व्यापार नहीं। बच्चों के नाम पर शोषण बंद होना चाहिए।”

    कई अभिभावकों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि केंद्र सरकार को निजी स्कूलों में हो रहे इस शोषण पर राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन जारी करनी चाहिए।

    लेकिन अभिभावकों का आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी कुछ स्कूल अप्रत्यक्ष दबाव डाल रहे हैं। बच्चों से कहा जा रहा है कि “स्कूल की दुकान से ही सामान लाओ, वरना क्लास में समस्या हो सकती है” या “बाहर से लाए गए सामान को मान्य नहीं किया जाएगा”। कुछ स्कूलों ने यूनिफॉर्म में मामूली बदलाव करके भी नई ड्रेस खरीदने को कहा है।

    अभिभावकों की शिकायतें:

    1. बाजार से सस्ता सामान लाने पर बच्चे को तंग किया जा रहा है।
    2. फीस के अलावा “स्टेशनरी चार्ज” और “ड्रेस चार्ज” के नाम पर अतिरिक्त वसूली जारी।
    3. कई स्कूलों ने अभी तक किताबों-यूनिफॉर्म की कीमत वाली लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है।

    एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
    “डीएम साहब का आदेश तो आ गया, लेकिन स्कूल वाले मान रहे ही नहीं। हम गरीब अभिभावक कहाँ-कहाँ शिकायत करेंगे? शिक्षा सेवा होनी चाहिए, व्यापार नहीं।”

    वी न्यूज 24 इस मुद्दे को लगातार फॉलो कर रहा है। जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की तरफ से इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, इसकी अपडेट हम जल्द देंगे।



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