सीतामढ़ी नगर निगम की बदहाल व्यवस्था: नाली, सड़क और जलनिकासी फेल, जनता परेशान
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सीतामढ़ी संवाददाता पवन साह के साथ सीनियर पत्रकार दीपक कुमार :
तारीख: 11 मई 2026
सीतामढ़ी नगर निगम की बदहाल व्यवस्था अब शहरवासियों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है। नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में नाली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश और घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। इसका सीधा असर शहर की सड़कों, गलियों और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
शहर के विभिन्न इलाकों में जगह-जगह पानी जमा रहने, नालियों के ओवरफ्लो होने और सड़कों पर कीचड़ फैलने से लोगों को रोजाना भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम टैक्स तो वसूलता है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
सड़कें बनीं तालाब, पैदल चलना भी मुश्किल
सीतामढ़ी शहर के कई मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर पानी निकासी नहीं होने के कारण सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगी हैं। कई जगह नालियों का पानी सीधे सड़क पर बह रहा है, जिससे सड़कें धीरे-धीरे टूट रही हैं।
बारिश के बाद हालात और भी खराब हो जाते हैं। गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को काफी परेशानी होती है। कई लोग फिसलकर घायल भी हो चुके हैं।
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गुणवत्ताहीन निर्माण पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर में बनने वाली कई सड़कें कुछ ही महीनों में टूट जाती हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर सड़क और नाली निर्माण कार्य सही मानकों के अनुसार हो, तो हर साल मरम्मत की जरूरत ही न पड़े। लेकिन यहां करोड़ों खर्च होने के बावजूद हालत जस की तस बनी हुई है।
40 वार्ड वाला नगर निगम, फिर भी सुविधाओं का अभाव
सीतामढ़ी नगर निगम में लगभग 40 वार्ड आते हैं, लेकिन इतने बड़े शहरी क्षेत्र में आज भी कई वार्ड मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नाली, सड़क, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और जलनिकासी जैसी सुविधाएं कई जगहों पर नाममात्र की हैं।
जनता का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद जनप्रतिनिधि क्षेत्र की समस्याओं से दूरी बना लेते हैं।
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बीमारियों का बढ़ रहा खतरा
जहां-जहां पानी जमा रहता है, वहां मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थानीय लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमण फैलने की आशंका सता रही है। गंदे पानी और जाम नालियों से बदबू फैलने के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
जनता पूछ रही—जिम्मेदार कौन?
नगर निगम की इस बदहाल स्थिति को लेकर शहरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जलनिकासी, सड़क मरम्मत और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आने वाले समय में हालात और भयावह हो सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि सीतामढ़ी शहर की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार कौन है—नगर निगम प्रशासन, जनप्रतिनिधि या लापरवाह सिस्टम?
लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर नालियों की सफाई कराई जाए, टूटी सड़कों की मरम्मत हो, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था बने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सीतामढ़ी की जनता अब भाषण नहीं, जमीन पर काम चाहती है।
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