राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा झटका: SIT के हाथ से निकला अहम सबूत, 45 दिन पुराना CCTV डेटा हुआ डिलीट
सब-हेडलाइन:
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच में नई चुनौती, अब बैंक रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच के सहारे आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश
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रिपोर्टर:दिनेश जयसवाल | We News 24 Digital Desk
अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ा झटका लगा है। जांच के दौरान पता चला है कि मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों का 45 दिन पुराना वीडियो बैकअप तकनीकी नियमों के तहत स्वतः डिलीट हो चुका है। ऐसे में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत हाथ से निकल जाने के कारण जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, सीसीटीवी सिस्टम में केवल 45 दिनों तक का डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता थी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पुराना फुटेज स्वतः हट गया, जिससे जांच टीम अब चोरी की पूरी समय-सीमा और तौर-तरीकों का पता लगाने में कठिनाई महसूस कर रही है।
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40 दान पेटियों और 50 कर्मचारियों की जांच
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने शुरुआती जांच के दौरान मंदिर परिसर में रखी लगभग 40 दान पेटियों का निरीक्षण किया था। इसके अलावा नोटों की गिनती और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े 50 से अधिक कर्मचारियों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए।
जांच एजेंसियों को उम्मीद थी कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से चोरी के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सकेगा, लेकिन अहम वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने से जांच की दिशा प्रभावित हुई है।
दो आरोपी गिरफ्तार, लाखों रुपये बरामद
हालांकि पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लाखों रुपये की नकदी बरामद की है। इससे यह संकेत मिला है कि चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी का मामला सामान्य नहीं बल्कि बड़े स्तर पर संचालित हो सकता है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि बरामद धनराशि और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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अब बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों पर फोकस
सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने के बाद एसआईटी ने जांच का फोकस बदल दिया है। अब टीम बैंक खातों के लेजर रिकॉर्ड, दान पेटियां खोलने और राशि जमा करने से संबंधित दस्तावेजों, सुरक्षा कर्मियों तथा बैंक अधिकारियों के बयान दर्ज कर रही है।
इसके साथ ही डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि डिलीट हो चुके डेटा को तकनीकी माध्यमों से रिकवर किया जा सके और जांच को मजबूत आधार मिल सके।
मुख्यमंत्री स्तर पर हो रही निगरानी
राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय होने के कारण इस मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार विशेष नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं जांच की प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बिना उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के चोरी की पूरी प्रक्रिया और उसमें शामिल लोगों की भूमिका को कैसे प्रमाणित किया जाए। आने वाले दिनों में डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट और वित्तीय दस्तावेज इस जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
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