ट्रंप का ईरान को खुला अल्टीमेटम: ‘परमाणु समझौता करो, वरना धरती से मिटा देंगे नामोनिशान’
सब-हेडलाइन:
ईरान के सुप्रीम लीडर के बयान पर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति, बोले- समझौते के लिए अमेरिका नहीं, तेहरान गिड़गिड़ा रहा था
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रिपोर्टर:दीपक कुमार
वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति एवं परमाणु समझौते को लेकर एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि समझौते के लिए अमेरिका नहीं बल्कि ईरान बेताब था और उसने ही मध्यस्थ देशों के माध्यम से बातचीत की पहल की थी।
ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि तेहरान ने परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो उसके खिलाफ और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि युद्ध के बाद ईरान की सैन्य क्षमता बुरी तरह कमजोर हो चुकी है और अमेरिका ने उसकी सामरिक ताकत को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
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"समझौते के लिए ईरान गिड़गिड़ाया था"
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि अमेरिका समझौते के लिए बेचैन था, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध समाप्त करने और समझौते तक पहुंचने के लिए ईरान ने ही लगातार प्रयास किए और विभिन्न मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत की पहल की।
ट्रंप ने कहा, "हम हताशा में नहीं मिले थे। ईरान बातचीत के लिए आया था। उनका खेल खत्म हो चुका है और अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।"
ईरान को आर्थिक मदद नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया कि अमेरिका ईरान को किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं देगा। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन परमाणु समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए 60 दिनों तक इंतजार करेगा, लेकिन इस दौरान ईरान को एक डॉलर तो दूर, "दस सेंट" तक नहीं दिए जाएंगे।
ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं पर कायम रहेगा, लेकिन ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक राहत देने का सवाल ही नहीं उठता।
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खामेनेई के बयान से बढ़ा विवाद
ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई है, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दावा किया था कि अमेरिकी प्रशासन समझौते को लेकर बेहद उत्सुक था और उसने इसे हासिल करने के लिए कई स्तरों पर दबाव बनाया।
मोजतबा खामेनेई ने यह भी कहा था कि उन्होंने प्रारंभ में समझौते का विरोध किया था, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों से राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा का भरोसा मिलने के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दी।
डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ नेता यह दावा कर रहे हैं कि युद्ध के बाद ईरान पहले से अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने ऐसे बयानों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह वास्तविकता से बिल्कुल विपरीत है।
ट्रंप के अनुसार, युद्ध ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और रक्षा तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान को पहले से ज्यादा मजबूत बता रहे हैं, वे जनता को गुमराह कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव
विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। हालांकि समझौते की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर जारी आरोप-प्रत्यारोप से भविष्य की वार्ताओं पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस कूटनीतिक टकराव पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।
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