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    दिल्ली में सख्ती! नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना, पुराने कमर्शियल वाहनों की एंट्री बैन, बिना PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

     


    दिल्ली में सख्ती! नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना, पुराने कमर्शियल वाहनों की एंट्री बैन, बिना PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

    सब-हेडलाइन:

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान, सर्दियों में प्रदूषण रोकने के लिए लागू होगा नया एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    दीपक कुमार | We News 24 Digital Desk


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली सरकार ने 'प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क' की घोषणा करते हुए कई कड़े प्रतिबंध लागू करने का ऐलान किया है, जो आगामी सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    सरकार के नए फैसले के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में बाहर के राज्यों में पंजीकृत नॉन-बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही निजी वाहनों के अत्यधिक उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक सरकारी एवं अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अब केवल वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) वाले वाहनों को ही दिल्ली के पेट्रोल और डीजल पंपों से ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा। जिन वाहनों के पास वैध PUC नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं मिलेगा।


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    किन वाहनों को मिलेगी छूट?

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीएनजी वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहन तथा सरकारी कार्यों में लगे वाहनों को इन प्रतिबंधों से छूट प्रदान की जाएगी।


    प्रदूषण रोकने के लिए अन्य बड़े कदम

    दिल्ली सरकार ने खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए विशेष निगरानी और अग्रिम योजना तैयार की जाएगी, ताकि सर्दियों के दौरान प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखा जा सके।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सर्दियों से कई महीने पहले ही इन नियमों और प्रतिबंधों की जानकारी जनता को दी जा रही है, ताकि लोगों को अपनी योजना बनाने और नियमों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान उत्पन्न होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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