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    अमेरिका-ईरान शांति समझौता खतरे में, लेबनान पर हमलों से बढ़ा पश्चिम एशिया का तनाव

     

    अमेरिका-ईरान शांति समझौता खतरे में, लेबनान पर हमलों से बढ़ा पश्चिम एशिया का तनाव


    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    रिपोर्टर: दीपक कुमार | We News 24 Digital Desk


    वाशिंगटन/बेरूत: पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में उठाया गया अमेरिका और ईरान का बड़ा कूटनीतिक कदम अब गंभीर संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में हुए प्रारंभिक शांति समझौते के बावजूद दक्षिणी लेबनान में इजरायल द्वारा की गई भीषण बमबारी ने क्षेत्रीय तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। इस हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत होने की खबर है।

    स्थिति को और जटिल बनाते हुए स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान की महत्वपूर्ण तकनीकी वार्ता भी फिलहाल टाल दी गई है, जिससे शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।



    वर्साय समझौते के बाद बढ़ी उम्मीदें

    जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron की मौजूदगी में फ्रांस के वर्साय पैलेस में अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस 14-सूत्रीय समझौते का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों को कम करना और विभिन्न मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना था।

    समझौते के तहत लेबनान सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम लागू करने की बात कही गई थी। इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीद जगी थी।



    स्विट्जरलैंड वार्ता टलने से बढ़ी चिंता

    शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच तकनीकी स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता प्रस्तावित थी। इस बैठक का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance को करना था, लेकिन उनका स्विट्जरलैंड दौरा स्थगित होने के बाद बैठक भी टाल दी गई।

    व्हाइट हाउस ने इसके पीछे व्यवस्थागत कारणों का हवाला दिया है। हालांकि क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि लेबनान पर जारी इजरायली हमलों से नाराज ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वार्ता में भेजने से इनकार कर दिया।

    इजरायल पर बढ़ रहा अमेरिकी दबाव

    शांति समझौते के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंतित है और इजरायल को संयम बरतने की आवश्यकता है। विश्लेषकों का मानना है कि वाशिंगटन अब युद्धविराम को सफल बनाने के लिए अपने सहयोगियों पर भी दबाव बढ़ा सकता है।


    60 दिन के युद्धविराम पर संकट

    बुधवार को हुए समझौते के तहत कम से कम 60 दिनों तक संघर्षविराम बनाए रखने पर सहमति बनी थी। लेकिन लेबनान में ताजा सैन्य कार्रवाई और स्विट्जरलैंड वार्ता के स्थगित होने से इस समझौते का भविष्य अधर में लटक गया है।

    अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं रुकी और अमेरिका-ईरान वार्ता जल्द बहाल नहीं हुई, तो पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की यह बड़ी कूटनीतिक पहल विफल हो सकती है। इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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