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    जन्म प्रमाणपत्र नहीं है तो क्या भारतीय नागरिक नहीं माने जाएंगे? गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को समझिए

     

    जन्म प्रमाणपत्र नहीं है तो क्या भारतीय नागरिक नहीं माने जाएंगे? गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को समझिए

    WE NEWS 24 EXCLUSIVE

    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल

    रिपोर्ट: असम संवाददाता | We News 24

    गुवाहाटी। क्या केवल जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड से ही भारतीय नागरिकता साबित होती है? क्या जिन लोगों का जन्म दशकों पहले हुआ और जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, वे भारतीय नागरिक नहीं माने जाएंगे?

    इन सवालों के बीच गुवाहाटी हाई कोर्ट के हालिया फैसले ने नागरिकता संबंधी कानून को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टता दी है। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर कानूनी विवाद खड़ा होता है, तो Foreigners Act, 1946 की धारा 9 के अनुसार स्वयं उस व्यक्ति पर यह साबित करने की जिम्मेदारी होती है कि वह भारतीय नागरिक है।

    हालांकि अदालत ने यह कहीं नहीं कहा कि केवल जन्म प्रमाणपत्र ही नागरिकता का एकमात्र प्रमाण है।


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    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला अमिनुल हक नामक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे कामरूप (असम) के विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) ने वर्ष 2019 में विदेशी घोषित किया था।

    इस आदेश को चुनौती देते हुए अमिनुल हक ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

    अपने पक्ष में उन्होंने कुल 16 दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें शामिल थे—

    1. 1951 का NRC रिकॉर्ड
    2. विभिन्न वर्षों की मतदाता सूची
    3. भूमि संबंधी दस्तावेज
    4. PAN कार्ड
    5. वोटर आईडी
    6. स्कूल प्रमाणपत्र

    इसके बावजूद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।


    अदालत ने दस्तावेज क्यों नहीं माने?

    हाई कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह महत्वपूर्ण होता है कि वे कानूनी रूप से एक-दूसरे से जुड़े हों।

    अदालत ने पाया—

    • परिवार के नाम अलग-अलग गांवों की मतदाता सूचियों में बिना स्पष्ट रिकॉर्ड के दिखाई दिए।
    • पिता, दादा और याचिकाकर्ता के बीच दस्तावेजी संबंध (Linkage) पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हो सका।
    • स्कूल प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी की गवाही भी प्रस्तुत नहीं की गई।

    इन्हीं कारणों से अदालत ने दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना।


    क्या जन्म प्रमाणपत्र नहीं होने से नागरिकता समाप्त हो जाती है?

    बिल्कुल नहीं।

    भारत में आज भी करोड़ों ऐसे नागरिक हैं जिनका जन्म उस समय हुआ था जब जन्म पंजीकरण अनिवार्य नहीं था या ग्रामीण क्षेत्रों में इसका पालन नहीं होता था।

    ऐसे लोगों के लिए नागरिकता साबित करने हेतु अन्य दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं, जैसे—

    1. पुराने मतदाता सूची रिकॉर्ड
    2. भूमि अभिलेख
    3. स्कूल रिकॉर्ड
    4. परिवार रजिस्टर
    5. पंचायत प्रमाणपत्र (जहां कानूनन स्वीकार्य हो)
    6. न्यायालय द्वारा स्वीकार्य अन्य दस्तावेज

    महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी दस्तावेज एक-दूसरे से तार्किक और कानूनी रूप से जुड़े हों।


    हाई कोर्ट का संदेश क्या है?

    इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि बिना जन्म प्रमाणपत्र वाला व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है।

    अदालत ने केवल इतना कहा है कि—

    यदि नागरिकता पर कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो संबंधित व्यक्ति को विश्वसनीय एवं परस्पर जुड़े दस्तावेजों के माध्यम से अपना दावा सिद्ध करना होगा।


    कानून क्या कहता है?

    Foreigners Act, 1946 की धारा 9 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के विदेशी होने का प्रश्न उठता है, तो उसे स्वयं यह साबित करना होगा कि वह विदेशी नहीं बल्कि भारतीय नागरिक है।

    यह प्रावधान विशेष रूप से असम में विदेशी न्यायाधिकरणों के मामलों में लागू होता है।


    We News 24 विश्लेषण

    यह फैसला दस्तावेजों की संख्या नहीं बल्कि उनकी विश्वसनीयता, निरंतरता और कानूनी वैधता पर जोर देता है।

    इसलिए जिन लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में नागरिकता संबंधी कोई कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो उनके पास ऐसे दस्तावेज होने चाहिए जो परिवार, निवास और पहचान का स्पष्ट एवं निरंतर रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सकें।


    (रिपोर्ट: असम संवाददाता | संपादन: दीपक कुमार | We News 24)

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