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    क्या E20 पेट्रोलियम मंत्री का दावा पूरी तरह सही है? ब्राजील जैसी गाड़ियां भारत में हैं क्या? जब पैसा पूरा तो मिलावटी पेट्रोल क्यों?

    क्या E20 पेट्रोलियम मंत्री का दावा पूरी तरह सही है? ब्राजील जैसी गाड़ियां भारत में हैं क्या? जब  पैसा पूरा तो मिलावटी पेट्रोल क्यों?



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    WE NEWS 24 | एक्सक्लूसिव फैक्ट-चेक विश्लेषण

    रिपोर्ट: दीपक कुमार, Editor, We News 24


    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर बहस तेज हो गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में कहा कि रेसिंग कारों में भी इथेनॉल का इस्तेमाल होता है, इससे गाड़ियों की एक्सेलरेशन (Acceleration) बेहतर होती है और भविष्य में भारत भी जरूरत पड़ने पर अधिक इथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ सकता है।

    लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या मंत्री की सफाई पूरी सच्चाई बताती है? क्या भारत में ब्राजील जैसी फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) गाड़ियां उपलब्ध हैं? और जब उपभोक्ता पेट्रोल का पूरा मूल्य चुका रहा है तो उसे मिश्रित (ब्लेंडेड) ईंधन क्यों दिया जा रहा है?

    We News 24 ने इस पूरे मुद्दे की तथ्यात्मक पड़ताल की।


    मंत्री ने क्या कहा?

    पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा—

    "रेसिंग कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल होता है। इससे एक्सेलरेशन बेहतर होता है, नॉकिंग कम होती है। माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह कई कारणों से होता है।"

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत फिलहाल E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक ही सीमित है और इससे आगे तभी जाएगा जब व्यापक परीक्षण पूरे होंगे।


    तथ्य जांच: मंत्री की बात कितनी सही?

    ✔ पहला तथ्य: रेसिंग कारों में इथेनॉल का उपयोग होता है।

    यह दावा सही है।

    ब्राजील, अमेरिका तथा कई अंतरराष्ट्रीय मोटर स्पोर्ट प्रतियोगिताओं में इथेनॉल आधारित हाई-ऑक्टेन ईंधन का प्रयोग किया जाता है।

    लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है।

    ये सामान्य सड़क पर चलने वाली कारें नहीं होतीं बल्कि विशेष रूप से तैयार की गई हाई-परफॉर्मेंस रेसिंग इंजन वाली गाड़ियां होती हैं।

    अर्थात रेसिंग कारों का उदाहरण सीधे आम भारतीय उपभोक्ता की कारों पर लागू नहीं किया जा सकता।


    ✔ दूसरा तथ्य: क्या भारत में ब्राजील जैसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां हैं?

    उत्तर: नहीं।

    यही सबसे बड़ा सवाल है।

    ब्राजील में अधिकांश नई गाड़ियां Flex Fuel Vehicle (FFV) होती हैं।

    इनमें चालक चाहे तो—

    1. 100% पेट्रोल
    2. E27
    3. E85
    4. या लगभग 100% इथेनॉल

    किसी भी अनुपात में ईंधन भर सकता है।

    भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है।

    भारत में अधिकांश वाहन केवल E20 तक के लिए डिजाइन किए गए हैं।

    पूरी तरह फ्लेक्स-फ्यूल वाहन अभी बेहद सीमित संख्या में हैं और आम बाजार में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।


    ✔ तीसरा तथ्य: क्या E20 से माइलेज कम होता है?

    उत्तर: हां।

    इथेनॉल की ऊर्जा (Energy Density) पेट्रोल से कम होती है।

    इसी कारण कई वैज्ञानिक अध्ययनों तथा ऑटोमोबाइल परीक्षणों में पाया गया है कि

    • E20 पर माइलेज लगभग 3% से 7% तक घट सकता है।

    हालांकि इसका असर वाहन मॉडल, इंजन तकनीक तथा ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है।


    ✔ चौथा तथ्य: सरकार E20 क्यों ला रही है?

    सरकार का कहना है कि इसके कई फायदे हैं—

    • विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी।
    • किसानों से गन्ना और मक्का खरीद बढ़ेगी।
    • कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
    • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

    भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल विदेशों से खरीदता है।


    सबसे बड़ा सवाल

    जब जनता पेट्रोल का पूरा पैसा दे रही है तो उसे मिश्रित पेट्रोल क्यों?

    यहीं से उपभोक्ताओं की नाराजगी शुरू होती है।

    आज भारत में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर मिलने वाला पेट्रोल E20 मिश्रित है।

    लेकिन इसकी कीमत लगभग वही है जो पहले शुद्ध पेट्रोल की थी।

    कई उपभोक्ताओं का सवाल है—

    • यदि इथेनॉल सस्ता है,
    • यदि सरकार आयात बचा रही है,
    • यदि तेल कंपनियों की लागत घट रही है,

    तो उपभोक्ताओं को कीमत में राहत क्यों नहीं मिल रही?

    सरकार का तर्क है कि पेट्रोल की कीमत केवल ईंधन की लागत से तय नहीं होती।

    इसमें शामिल होते हैं—

    • केंद्रीय उत्पाद शुल्क,
    • राज्य सरकारों का VAT,
    • परिवहन लागत,
    • डीलर कमीशन,
    • अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत,
    • रिफाइनिंग लागत।

    इसी कारण इथेनॉल मिश्रण बढ़ने के बावजूद खुदरा कीमत में सीधी कमी दिखाई नहीं देती।


    तेल कंपनियों के नुकसान का दावा

    मंत्री ने कहा कि अप्रैल-जून 2026 के दौरान

    सरकारी तेल विपणन कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी लगभग ₹1.89 लाख करोड़ रही।

    उनके अनुसार इसका मुख्य कारण मध्य-पूर्व संकट के दौरान महंगा कच्चा तेल खरीदना और उपभोक्ताओं को नियंत्रित कीमत पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी उपलब्ध कराना रहा।

    हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों का मूल्यांकन कंपनियों की ऑडिटेड वित्तीय रिपोर्ट और तिमाही परिणामों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।


    क्या भविष्य में E25 आएगा?

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि

    भारत फिलहाल केवल E20 पर है।

    E25 या उससे अधिक मिश्रण तभी लागू किया जाएगा जब

    • वाहन निर्माता,
    • ARAI,
    • SIAM,
    • तेल कंपनियां,

    सभी आवश्यक परीक्षण पूरे कर लेंगे।


    विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि

    भारत में इथेनॉल मिश्रण नीति ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    लेकिन इसके साथ सरकार को तीन बातों पर विशेष ध्यान देना होगा—

    • उपभोक्ता को स्पष्ट जानकारी मिले कि वाहन किस ईंधन के लिए उपयुक्त है।
    • माइलेज में संभावित कमी के बारे में पारदर्शिता रखी जाए।
    • यदि इथेनॉल मिश्रण से लागत में वास्तविक बचत होती है, तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक भी पहुंचे।

    निष्कर्ष

    पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का यह दावा कि रेसिंग कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल होता है, तथ्यात्मक रूप से सही है।

    लेकिन यह उदाहरण सीधे भारत के आम वाहन उपयोगकर्ताओं पर लागू नहीं होता, क्योंकि भारत में अभी ब्राजील जैसी फ्लेक्स-फ्यूल वाहन व्यवस्था व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।

    E20 नीति के पीछे ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और आयात में कमी जैसे मजबूत तर्क हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की यह मांग भी उचित है कि यदि वे पूरा मूल्य चुका रहे हैं, तो ईंधन की गुणवत्ता, माइलेज पर प्रभाव और मूल्य निर्धारण में पूरी पारदर्शिता हो।


    (We News 24 Fact Check Desk का उद्देश्य तथ्यों के आधार पर सार्वजनिक दावों की जांच करना है। यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी नीतियों, सार्वजनिक बयानों और तकनीकी जानकारी पर आधारित विश्लेषण है।)

     

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