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    दिल्ली में हजारों लीजहोल्ड प्रॉपर्टी मालिकों को झटका, DDA ने फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की लंबित अर्जियां रोकीं

    दिल्ली में हजारों लीजहोल्ड प्रॉपर्टी मालिकों को झटका, DDA ने फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की लंबित अर्जियां रोकीं


    केंद्र ने राज्यसभा में दी जानकारी, पॉलिसी की समीक्षा पूरी होने तक नहीं होगी लंबित आवेदनों पर कार्रवाई

    📢 We News 24 Digital News / वी न्यूज 24 डिजिटल


    नई दिल्ली। दिल्ली में अपने लीजहोल्ड मकानों और अन्य रिहायशी संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने का इंतजार कर रहे हजारों प्रॉपर्टी मालिकों को फिलहाल और इंतजार करना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अपनी फ्रीहोल्ड कन्वर्जन पॉलिसी की समीक्षा कर रहा है। इसी वजह से कन्वर्जन के लिए प्राप्त सभी लंबित आवेदनों पर फिलहाल कार्रवाई रोक दी गई है।

    केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। सरकार के मुताबिक पॉलिसी की समीक्षा का उद्देश्य रिहायशी संपत्तियों के कन्वर्जन की प्रक्रिया को सरल, बेहतर और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।


    पॉलिसी की समीक्षा पूरी होने तक रुकी रहेगी कार्रवाई

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जब तक DDA की पॉलिसी समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक लंबित कन्वर्जन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    इसका मतलब यह है कि जिन प्रॉपर्टी मालिकों ने अपनी लीजहोल्ड संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराने के लिए आवेदन किया है, उन्हें फिलहाल नई नीति या समीक्षा पूरी होने तक इंतजार करना होगा।

    हालांकि, यह कदम फ्रीहोल्ड कन्वर्जन की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय नहीं है। फिलहाल मौजूदा प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगाई गई है।


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    क्या होता है लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड कन्वर्जन?

    लीजहोल्ड व्यवस्था में संपत्ति मालिक को जमीन या संपत्ति लंबे समय की लीज के आधार पर प्राप्त होती है। वहीं फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के बाद संपत्ति पर मालिकाना अधिकार अधिक स्थायी स्वरूप प्राप्त करता है।

    दिल्ली में बड़ी संख्या में रिहायशी संपत्तियां DDA की लीज पर दी गई जमीन पर विकसित हुई हैं। ऐसे संपत्ति मालिकों के लिए फ्रीहोल्ड कन्वर्जन महत्वपूर्ण माना जाता है।

    किन संपत्तियों को मिलता है कन्वर्जन का लाभ?

    मौजूदा नीति के तहत विभिन्न प्रकार की रिहायशी संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने का प्रावधान है। इसमें बने-बनाए रिहायशी प्लॉट, कुछ निर्धारित श्रेणियों को छोड़कर, शामिल हैं।

    इसके अलावा DDA की ओर से आवंटित LIG, MIG, HIG और SFS फ्लैट भी इस व्यवस्था के दायरे में आते हैं। इनमें एशियन गेम्स विलेज कॉम्प्लेक्स के फ्लैट भी शामिल हैं।

    DDA की लीज पर ली गई जमीन पर कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों की ओर से बनाए गए फ्लैट भी कन्वर्जन व्यवस्था में शामिल हैं।


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    फ्रीहोल्ड कन्वर्जन के लिए जरूरी हैं कई शर्तें

    फ्रीहोल्ड कन्वर्जन कोई स्वत: मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है।

    संपत्ति पर स्वामित्व को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। इसके अलावा लीज या अलॉटमेंट दस्तावेजों में जमीन का उपयोग रिहायशी होना आवश्यक है।

    यदि संपत्ति को किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखा गया है, तो कन्वर्जन के लिए संबंधित सभी मॉर्गेजी से NOC यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र भी जमा करना होता है।

    कन्वर्जन चार्ज का भुगतान कैसे होता है?

    मौजूदा व्यवस्था के तहत कन्वर्जन चार्ज का भुगतान एकमुश्त किया जा सकता है। इसके अलावा अधिकतम पांच वर्षों तक वार्षिक किस्तों में भुगतान का विकल्प भी है।

    किस्तों में भुगतान करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होता है। पूरी बकाया राशि का भुगतान होने के बाद ही कन्वर्जन प्रक्रिया पूरी होती है।

    आवेदकों को निर्धारित दस्तावेजों के साथ 200 रुपये की प्रोसेसिंग फीस भी जमा करनी होती है। कन्वर्जन चार्ज का भुगतान चेक, पे ऑर्डर या बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से किया जा सकता है। 20 हजार रुपये से कम की राशि के लिए नकद भुगतान का भी प्रावधान है।

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    इलाके और जमीन की दरों के आधार पर तय होता है चार्ज

    कन्वर्जन चार्ज की गणना संबंधित इलाके और जोन में लागू जमीन की दरों के आधार पर की जाती है। इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में संपत्ति के लिए देय कन्वर्जन राशि अलग हो सकती है।

    हजारों संपत्ति मालिकों की नजर अब नई नीति पर

    DDA की ओर से पॉलिसी की समीक्षा किए जाने के बाद अब दिल्ली के हजारों लीजहोल्ड संपत्ति मालिकों की नजर नई व्यवस्था पर है।

    यदि समीक्षा के बाद प्रक्रिया को सरल बनाया जाता है, तो भविष्य में आवेदकों को दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं में राहत मिल सकती है। हालांकि, नई नीति में क्या बदलाव होंगे, इसकी तस्वीर समीक्षा पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    फिलहाल तत्काल प्रभाव यही है कि लंबित फ्रीहोल्ड कन्वर्जन आवेदनों पर कार्रवाई रोक दी गई है। ऐसे में आवेदकों को DDA की ओर से समीक्षा पूरी होने और नई प्रक्रिया की जानकारी जारी होने का इंतजार करना होगा।

    दीपक कुमार | वरिष्ठ संवाददाता, We News 24

     

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