नेपाल बाढ़: सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आई संभावित वजह, मौत का आंकड़ा 157 पार,भारत ने मदद की पेशकश

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काठमांडू / नई दिल्ली | स्थानीय रिपोर्टर: राहुल शर्मा
नेपाल-चीन सीमा के पास आई जानलेवा फ्लैश फ्लड की संभावित वजह के नए सुराग सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आए हैं। नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) द्वारा शेयर किए गए प्लैनेट लैब्स के विश्लेषण से पता चलता है कि बर्फ और चट्टान के बड़े लैंडस्लाइड ने मलबे वाली जबरदस्त बाढ़ पैदा की हो सकती है।
यह घटना रसुवागढ़ी नेपाल-चीन बॉर्डर क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई। शुरुआती आकलन के मुताबिक, ग्लेशियर जोन के पास बर्फ और चट्टान का विशाल हिस्सा टूटकर अलग हो गया। यह या तो किसी ग्लेशियल झील में गिरा या नदी के रास्ते में रुकावट पैदा कर दी। इसके बाद पिघली बर्फ, पानी, बर्फ और मलबा ल्हेन्डे खोला (Lhende Khola) से होते हुए भोटे कोशी नदी में जा गिरा, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई।
सैटेलाइट इमेज से तबाही का अंदाजा
प्लैनेट लैब्स ने 25 और 26 अगस्त की तस्वीरों की तुलना की है, जिसमें बाढ़ के बाद प्रभावित इलाके में बड़े बदलाव साफ दिखते हैं। महज 30 मिनट में पानी का लेवल 9 मीटर तक बढ़ गया। इस आपदा ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को अपनी चपेट में ले लिया।
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नेपाली अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सैकड़ों लोग लापता हैं। पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक 500 से अधिक पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, मलेशिया और अन्य देशों के सैकड़ों विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय हैं, जिनमें तिब्बत में माउंट कैलाश की यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्री भी शामिल माने जा रहे हैं।
भारत की मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और भारत के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया। मोदी ने कहा, “भारत नेपाल को हर तरह की मानवीय मदद देने के लिए तैयार है। हमारी टीमें बचाव और राहत कार्यों में तालमेल बिठा रही हैं।”
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में भी इसी इलाके में ग्लेशियल झील फटने से बाढ़ आई थी, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन को जोड़ने वाले पुल समेत अहम इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हुआ था।
राहत और बचाव अभियान जारी है। मौत और लापता लोगों के आंकड़े अभी बदल सकते हैं।
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