कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर विवाद, ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर बहस

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नई दिल्ली | स्थानीय रिपोर्टर: अंजली कुमारी
अभिनेत्री कृति सेनन के एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। विवाद की जड़ कृति के पहनावे को बताया जा रहा है। विज्ञापन में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न स्टाइल का आउटफिट पहना है—ऑफ-व्हाइट रंग का ब्रालेट जैसा ब्लाउज और ड्रेप्ड स्कर्ट।
विज्ञापन में कृति अपने ऑनस्क्रीन भाई की कलाई पर राखी बांधती दिखती हैं और मजाकिया अंदाज में अपने पालतू कुत्ते के पैर पर भी राखी बांधती नजर आती हैं। जैसे ही यह टीवी और इंटरनेट पर प्रसारित होना शुरू हुआ, एक वर्ग ने इसे रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार के लिए अनुचित बताया।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
ज्यादातर आपत्तियां दो बिंदुओं पर केंद्रित हैं—ब्लाउज की डीप नेकलाइन और ब्रालेट जैसा लुक। यूजर्स का कहना है कि यह त्योहार की भावना और परंपरा से मेल नहीं खाता। कुछ लोगों ने तर्क दिया कि रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और सुरक्षा का त्योहार है, इसलिए ऐसे पहनावे से मर्यादा का उल्लंघन होता है। रचनात्मक आजादी ठीक है, लेकिन त्योहार का मूल भाव प्रभावित नहीं होना चाहिए—यह भी एक आम राय रही।
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कंगना रनौत और कृति सेनन की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि महिलाओं के पास पहनावे के कई विकल्प हैं, फिर भाई-बहन के त्योहार पर ऐसे लुक की क्या जरूरत थी। उन्होंने विज्ञापन को जानबूझकर अजीब बनाया गया बताया।
लगातार ट्रोलिंग के बीच कृति सेनन ने साफ कहा कि उनके लिए रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा के वादे का त्योहार है, न कि किसी खास पहनावे का। उन्होंने लिखा कि किसी पर्व की असली खूबसूरती कपड़ों में नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपराओं में होती है। कृति ने सवाल उठाया कि महिलाओं को यह बताना कब बंद होगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए और कहा कि संस्कृति दिल में होती है, ब्लाउज की नेकलाइन में नहीं।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया। शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत ने कृति का बचाव करते हुए आलोचकों को गंभीरता से न लेने की सलाह दी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कृति के पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर कर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि महिला क्या पहनती है, क्या करती है और कहां जाती है—यह उसकी अपनी पसंद का मामला है। महिलाओं को आजादी के इस्तेमाल पर ट्रोल करना बंद होना चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद ब्रांड ने विज्ञापन हटा लिया।
परंपरा बनाम आधुनिकता की पुरानी बहस
यह पहली बार नहीं है जब त्योहारी विज्ञापन विवाद में आया हो। हर त्योहार सीजन में कोई न कोई ब्रांड ऐसी बहस का केंद्र बन जाता है। जैसे-जैसे ब्रांड इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन और मॉडर्न कॉन्सेप्ट से युवा दर्शकों को लुभाने की कोशिश करते हैं, समाज का एक वर्ग इसे परंपरा के खिलाफ बताता है।
इस विवाद ने एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या परंपरा कपड़ों से तय होती है या उस भावना से जिसके साथ त्योहार मनाया जाता है? भारत जैसे विविधता भरे देश में पहनावा, खान-पान और रीति-रिवाज क्षेत्र, समुदाय और परिवार के हिसाब से अलग-अलग रहे हैं। अब बहस कपड़ों से आगे बढ़कर यह बन गई है कि महिला के शरीर और उसकी पसंद पर किसका अधिकार है।
कृति सेनन का यह विज्ञापन महज कपड़े का मसला नहीं रह गया है। यह हर पीढ़ी और हर त्योहार के साथ लौटने वाली बहस बन चुका है—बदलते समाज में परंपरा की परिभाषा कौन तय करेगा?
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