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    हम पैसे देकर ला रहे है अपने घरो में धीमा जहर ,बड़ा खुलासा, 70,652 सैंपल में 3.1% तय सीमा से अधिक

     

    हम पैसे देकर ला रहे है अपने घरो में धीमा जहर ,बड़ा खुलासा, 70,652 सैंपल में 3.1% तय सीमा से अधिक


    लोकसभा में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखे आंकड़े, 96.9% सैंपल में अवशेष सुरक्षित सीमा के भीतर मिले

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    नई दिल्ली। हमारी रोजमर्रा की थाली में शामिल फल और सब्जियों की सुरक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में देश में खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और कृषि उत्पादों के व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच देशभर में फल और सब्जियों के 70,652 सैंपल की जांच की गई। इनमें से 2,223 सैंपल यानी करीब 3.1 प्रतिशत में कीटनाशक अवशेष FSSAI की निर्धारित सुरक्षित सीमा यानी MRL (Maximum Residue Limit) से अधिक पाए गए।

    इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध हर फल या सब्जी असुरक्षित है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 96.9 प्रतिशत सैंपल में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सुरक्षित सीमा के भीतर पाए गए।


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    70 हजार से ज्यादा सैंपल की निगरानी

    सरकार लंबे समय से कृषि उत्पादों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी कर रही है। इसके तहत Monitoring of Pesticide Residues at National Level (MPRNL) कार्यक्रम के माध्यम से कृषि उत्पादों के नमूनों की जांच की जाती है।

    इस निगरानी व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। खेतों की GPS लोकेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों से ट्रैकिंग कर सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

    भारत बना फल-सब्जियों का शुद्ध निर्यातक

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत फल और सब्जियों के मामले में अभी भी शुद्ध निर्यातक देश बना हुआ है।

    वर्ष 2016-17 में फल एवं सब्जियों का निर्यात 2.45 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3.93 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में करीब 58.2 लाख टन फल एवं सब्जियों का निर्यात किया गया।

    हालांकि, घरेलू मांग बढ़ने के कारण इनके आयात में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में जहां आयात करीब 1.78 अरब डॉलर था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 3.82 अरब डॉलर हो गया।


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    डिजिटल तकनीक से फसल उत्पादन का आकलन

    सरकार ने फसल उत्पादन के अधिक सटीक अनुमान के लिए Digital General Crop Estimation Survey (DGCES) को भी विस्तार दिया है। यह व्यवस्था अब 23 राज्यों में लागू है।

    इसके तहत फसल कटाई से जुड़े आंकड़े मोबाइल ऐप और GPS आधारित फोटो के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं। इससे फसल उत्पादन के आंकड़ों को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    ड्राफ्ट शुगर्स ऑर्डर 2026 वापस लिया गया

    सरकार ने हितधारकों से मिले सुझावों के बाद ‘Draft Sugars (Control) Order, 2026’ को वापस लेने का फैसला भी किया है।

    सरकार की ओर से यह कदम संबंधित पक्षों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।

    खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

    खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार National Mission on Edible Oils – Oil Palm (NMEO-OP) के तहत ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दे रही है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 2.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती शुरू की जा चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि अगले चार से पांच वर्षों में इन पौधों के पूर्ण उत्पादन में आने के बाद इसके परिणाम अधिक स्पष्ट दिखाई देंगे।

    9.05 लाख टन रबर का उत्पादन, फिर भी आयात की जरूरत

    रबर उत्पादन को लेकर भी सरकार ने आंकड़े साझा किए हैं। वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 9.05 लाख टन रबर का उत्पादन किया, जबकि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 4.59 लाख टन रबर का आयात करना पड़ा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया है। रबर की औसत कीमत करीब 197 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 253 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।

    डरने के बजाय जागरूक रहने की जरूरत

    फल और सब्जियों में कीटनाशक अवशेषों से जुड़े आंकड़े सामने आने के बाद विशेषज्ञ स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ताओं में अनावश्यक डर पैदा करने के बजाय उन्हें जागरूक किया जाए।

    सरकार का जोर केवल कीटनाशकों के इस्तेमाल को रोकने पर नहीं, बल्कि एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM), सुरक्षित कृषि पद्धतियों, डिजिटल निगरानी और कृषि उत्पादन में वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देने पर भी है।

    70 हजार से अधिक सैंपलों की जांच में 3.1 प्रतिशत नमूनों में निर्धारित MRL से अधिक अवशेष पाए जाना निगरानी व्यवस्था की जरूरत को भी सामने लाता है। वहीं 96.9 प्रतिशत सैंपलों का निर्धारित सीमा के भीतर होना यह संकेत देता है कि बाजार में उपलब्ध हर फल और सब्जी को असुरक्षित मानना सही नहीं होगा।

    आने वाले समय में खेत से लेकर बाजार तक निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।

    संजय तिवारी | नई दिल्ली संवाददाता, We News 24

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