Trump on Strait of Hormuz: ट्रंप ने होर्मुज को बताया ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’, मैप शेयर कर बढ़ाया तनाव; ईरान से टकराव और गहराया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर होर्मुज जलडमरूमध्य का मैप शेयर कर उसे “New U.S. Territory” बताया है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस दावे से विवाद बढ़ गया है।

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और कूटनीतिक तनाव अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित होता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक नक्शा साझा किया, जिस पर होर्मुज जलडमरूमध्य को “NEW U.S. Territory” यानी “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया है। ट्रंप ने इससे पहले भी होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया था।
हालांकि, ट्रंप के इस पोस्ट का मतलब यह नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज अब अमेरिका का हिस्सा बन गया है। यह ट्रंप की ओर से किया गया राजनीतिक दावा है, जिस पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल उठना तय है।
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ट्रंप ने मैप के जरिए दिया बड़ा संदेश
ट्रंप की ओर से साझा किए गए मैप में ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य के हिस्से को चिन्हित किया गया है। इसके ऊपर “NEW U.S. Territory” लिखा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने इस पोस्ट के साथ कोई विस्तृत कानूनी व्याख्या नहीं दी।
यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और नियंत्रण को लेकर तनाव चरम पर है।
पहले भी कर चुके हैं ‘पूरे नियंत्रण’ का दावा
ट्रंप इससे पहले 12 अगस्त को दावा कर चुके हैं कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर “पूरी तरह नियंत्रण” है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को “Wall of Steel” बताते हुए कहा था कि ईरान इसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकता।
इसके बाद ट्रंप ने शुक्रवार को भी संकेत दिया था कि ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त होने के बाद वह होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। अब नए मैप के जरिए उन्होंने इस दावे को और आक्रामक रूप से सामने रखा है।
होर्मुज पर अमेरिका और ईरान आमने-सामने
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित बेहद रणनीतिक समुद्री मार्ग है। दुनिया के तेल और ऊर्जा व्यापार के लिए इसकी अहमियत बहुत अधिक है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका चाहता है कि इस समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी रहे। दूसरी तरफ ईरान होर्मुज में अपने प्रभाव और नियंत्रण को महत्वपूर्ण मानता है। इसी मुद्दे ने दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को और जटिल बना दिया है।
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ईरान पहले ही कर चुका है अमेरिकी दावे को खारिज
ट्रंप के होर्मुज पर नियंत्रण के दावे को ईरानी पक्ष पहले ही खारिज कर चुका है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर किए गए अमेरिकी दावे जमीनी स्थिति को नहीं बदल सकते।
वहीं, शिपिंग गतिविधियों पर नजर रखने वाली रिपोर्टों से भी यह तस्वीर सामने आती है कि अमेरिकी नियंत्रण के दावे के बावजूद होर्मुज में समुद्री यातायात सामान्य स्थिति में नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध से पहले जहां प्रतिदिन 130 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, हाल की स्थिति में यह संख्या काफी नीचे आ गई है।
ओमान भी बना अहम कड़ी
होर्मुज विवाद में ओमान की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। ओमान ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। हाल के दिनों में ट्रंप ने ओमान को लेकर भी कड़े बयान दिए हैं और आरोप लगाया है कि वह अमेरिकी प्रयासों में बाधा डाल रहा है।
ऐसे समय में ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर बातचीत और सुरक्षित जहाजरानी की संभावनाएं भी क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
क्या सच में अमेरिका का हिस्सा बन सकता है होर्मुज?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। ट्रंप ने मैप पर होर्मुज को “NEW U.S. Territory” बताया है, लेकिन केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान या सोशल मीडिया पोस्ट से किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का कानूनी दर्जा नहीं बदल जाता।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को अमेरिकी दावे और राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा। यदि अमेरिका वास्तव में होर्मुज पर क्षेत्रीय दावा आगे बढ़ाता है तो इससे ईरान ही नहीं, बल्कि ओमान और अन्य खाड़ी देशों के साथ भी बड़ा कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो सकता है।
अब आगे क्या?
ट्रंप के नए मैप के बाद होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष सैन्य टकराव को आगे बढ़ाएंगे या समुद्री मार्ग खोलने के लिए कोई नया समझौता तलाशेंगे।
फिलहाल इतना साफ है कि होर्मुज अब सिर्फ एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे संवेदनशील रणनीतिक मोर्चा बन चुका है। यहां होने वाला कोई भी बड़ा घटनाक्रम तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।
रिपोर्ट: समीर खान, अंतरराष्ट्रीय मामलों के संवाददाता | We News 24
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